ब्रिटेन में विदेशी डॉक्टरों की होगी कड़ी परीक्षा

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ब्रिटेन में किए गए एक शोध के मुताबिक़ देश की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में काम करने के इच्छुक विदेशी डॉक्टरों की परीक्षा को कठिन बनाया जाना चाहिए ताकि उन्हें ब्रितानी मानकों के बराबर लाया जा सके.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोध में यह पता चला है कि ब्रिटेन के डॉक्टरों और विदेशी डॉक्टरों की 'क्षमताओं में काफ़ी अंतर' है.

शोध में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों के लिए परीक्षा में पास होने के लिए तय किए गए अंक को 'ज़्यादा बढ़ा देना ' चाहिए.

लेकिन ब्रिटेन के विदेशी डॉक्टरों की संस्था बीआईडीए शोध के परिणामों से इत्तेफ़ाक नहीं रखती. उसका कहना है कि सभी के लिए एक मानक परीक्षा होनी चाहिए.

जनरल मेडिकल काउंसिल (जीएमसी) के मुताबिक़ इस रिसर्च से पता चलता है कि एक साल में 1300 विदेशी डॉक्टर भाषा और क्लिनिकल क्षमता की परीक्षा पास करते हैं.

लेकिन उनके काम करने की क्षमता के आधार पर कहा जा सकता है कि उनमें से आधे से अधिक इसके लायक नहीं है.

सुझाव

जीएमसी ने शोध के आधार पर विदेशी डॉक्टरों के लिए होने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए अंकों को 63 फ़ीसदी से बढ़ाकर 76 फ़ीसदी करने का सुझाव दिया है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में मनोविज्ञान और मेडिकल एजुकेशन के प्रोफ़ेसर क्रिस मैकमैनस ने बीबीसी रेडियो 4 के टुडे प्रोग्राम में बताया कि फिलहाल यह सबसे सही समाधान है लेकिन लंबे समय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान परीक्षा का प्रावधान होना चाहिए जिसमें सभी लोग एक समान बैठ सकें.

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उन्होंने कहा, "लेकिन ऐसा कर पाना शायद बहुत मुश्किल हो."

प्रोफ़ेसर मैकमैनस ने कहा कि इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि इस व्यवस्था में सबसे निचले स्तर मौजूद कुछ लोग अच्छा काम नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा, "मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि एनएचएस में ऊपरी स्तर पर बहुत से लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और एनएचएस उनपर ही टिका हुआ है. वे अपने क्षेत्र में निपुण हैं."

ज़बरदस्त क्षमता

आंकड़ों को देखें तो 2012 तक पांच साल में 669 डॉक्टरों को उनके काम से निष्कासित किया गया था. उनमें से 420 डॉक्टर विदेश से पढ़कर ब्रिटेन आए थे.

बीआईडीए के उपाध्यक्ष उमेश प्रभु ने कहा कि अगर यह साबित होता है कि सभी डॉक्टरों को एक समान मानक पर परखा जाता है तो वे परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए अंकों को बढ़ाने का समर्थन करेंगे.

उन्होंने कहा "राष्ट्रीय स्वास्थ सेवा में विदेश से आए डॉक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं."

उन्होंने यह भी कहा, "बाहर से आए डॉक्टरों के बिना एनएचएस की नींव पूरी तरह हिल जाएगी. जिन डॉक्टरों को निकाला गया है उनमें से बाहर के डॉक्टरों की संख्या बहुत कम होती है. इस बात को स्वीकार करना ज़रूरी है कि हम मरीज़ों की जान बचाते हैं."

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एसोसिएशन ने इस बात की भी आशंका जताई है कि परीक्षा को कठिन करने से डॉक्टरों की कमी हो सकती है.

भाषा की जांच

ब्रिटेन में लगभग 95,000 विदेशी डॉक्टर काम करते हैं जो कि डॉक्टरों की कुल संख्या का एक चौथाई है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोध के निष्कर्षों को अच्छी तरह परखने और यह तय करने के लिए कि क्या सच में इन परीक्षाओं में सुधार की आवश्यकता है, जीएमसी ने एक समूह बनाया है.

ऐसा हो सकता है कि आने वाली गर्मियों में ब्रिटेन में यूरोपियन डॉक्टरों के लिए भाषा की परीक्षा थोड़ी कठिन हो जाएगी.

जीएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निएल डिक्शन ने बीबीसी को बताया कि विदेश से आए बहुत से डॉक्टरों का ख़ुद भी यह मानते हैं कि उन्हें ब्रिटेन में काम करने में दिक़्क़तें आती हैं.

Image caption खारकिव में विदेशी डॉक्टरस

डिक्शन ने कहा कि बाहर से आने वाले डॉक्टरों की परेशानियों को दूर करने की दिशा में अधिक काम करने की आवश्यकता है और उनके सामने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर आने वाली दिक़्क़तों को दूर किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, "डॉक्टर फूल की तरह होते हैं. हम उन्हें एक बागान से तोड़ दूसरे बागान में लगा दें और सोचें कि ये वहां भी अच्छी तरह खिलेंगे तो ऐसा होना मुश्किल है."

डिक्शन ने माना कि विदेशी ज़मीन पर बाहर से आये डॉक्टरों को मदद और विश्वास की ज़रूरत होती है.

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