क्या यूएई निवासियों के लिए लंदन सुरक्षित नहीं?

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कोई वायरल हैशटैग किसी शहर की छवि को कितनी जल्दी नुक़सान पहुंचा सकता है?

लंदन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) बहुत अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं. हर साल यूएई से हज़ारों पर्यटक इंग्लैंड की राजधानी आते हैं और शहर की सबसे बड़ी फ़ुटबॉल दर्शकदीर्घा, आर्सेनल का अमीरात स्टेडियम है.

लेकिन शहर में हुए एक हिंसक हमले के बाद हज़ारों अमीराती यूज़र्स '#लंदन_इज़_नॉट_सेफ़' से ट्वीट कर रहे हैं, जिससे इस संबंध के ख़राब होने का ख़तरा पैदा हो गया है.

समाचारों के अनुसार मंगलवार को सात लोग चाकू, हथौड़े और बंदूक़े लहराते हुए शहर के एक अपार्टमेंट में घुस गए और एक अमीराती युगल के पैसे, गहने और क्रेडिट कार चोरी कर ले गए.

इस घटना से कुछ हफ़्ते पहले ही शहर के एक लग्ज़री होटल में तीन अमीराती बहनों पर हमला किया गया था, जिसके लिए एक ब्रितानी मंत्री ने सहानुभूति भी जताई थी.

'बेतुका चलन'

ताज़ा हमले ने लंदन में सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के लए एक सोशल मीडिया कैंपेन को प्रेरित किया.

एक अमीराती ट्विटर एकाउंट से शुरू किए गए '#लंदन_इज़_नॉट_सेफ़' हैशटैग से बीस घंटे में ही 3,500 ट्वीट हो चुके थे.

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"लंदन में रह रहे अमीराती चिंतित हैं", ट्वीट करने वाले बदर अल काबी ने बीबीसी ट्रेंडिंग से कहा, "मैं असुरक्षित महसूस करता हूं क्योकिं दो परिवारों पर हमला किया गया है और लंदन पुलिस ने कुछ नहीं किया."

मूलतः यूएई के निवासी अल काबी का कहना है कि वह सामान्यतः लंदन आना पसंद करते हैं लेकिन अब उन्होंने ट्वीट किया है, "लंदन को ना और पेरिस, रोम को हां."

इस हैशटैग का इस्तेमाल करने वालों ने जो तस्वीर सबसे ज़्यादा शेयर की है उसमें दुबई शहर की ऊंची इमारतों के साथ एक हथौड़े को दिखाया गया है. इसमें लिखा है, "दुबई की गर्मी लंदन के हथौड़े से बेहतर है."

अन्य अमीरातियों का कहना है कि सिर्फ़ लंदन को ही चिन्हित करना ग़लत है.

बुद्धिजीवी क्यू बैसी कहते हैं, "यह कहना ठीक नहीं है '#लंदन_इज़_नॉट_सेफ़'. ऐसा हर जगह होता है, यूएई में भी."

एक अन्य व्यक्ति ने ट्वीट किया, "अपराधियों के कृत्य के लिए लंदन पर आरोप लगाना ठीक नहीं है."

मरयम गिग्स ने ट्वीट किया, "#लंदन_इज़_नॉट_सेफ़ सबसे बेतुका चलन है. दुनिया ही सुरक्षित नहीं है. आप जहां भी जाएं आपको अपना ख़्याल रखना होता है."

ख़ास बात यह है कि यह चलन उसी दिन शुरू हुआ जिस दिन हॉस्पिटल एएंडई विभाग के सालाना आंकड़ों में बताया गया कि इंग्लैंड और वेल्स में हिंसक अपाधों में कमी आना जारी है.

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