हाँगकाँग में बीजिंग से लोकतांत्रिक सुधारों की मांग

हाँगकाँग में 'ऑक्युपाई सेंट्रल'  के सदस्य इमेज कॉपीरइट AP

हाँगकाँग के वित्तीय कर्मचारी एकजुट हैं! शहर के समाचार पत्रों में चीनी और अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित एक विज्ञापन का यही आशय था.

ये एकजुटता वेतन बढ़ाने के लिए सामूहिक मोलतोल, या सुस्त पड़े शेयर बाजार में उछाल लाने के उपायों के लिए नहीं है.

इसके बजाए विज्ञापन में बैंकर्स, ट्रेडर्स और अन्य वित्तीय पेशेवरों से कहा गया है कि वो एक विश्वस्तरीय वित्तीय राजधानी के रूप में हाँगकाँग के दर्जे को बचाने के लिए लोकतांत्रिक सुधारों की मांग करें.

पूरे पेज के इस विज्ञापन को एक पत्र के रूप में प्रकाशित किया गया है, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और हाँगकाँग में चीन सरकार के संपर्क कार्यालय के प्रमुख झांग शिओमिंग को सम्बोधित है.

पत्र का शीर्षक 'हमारे कम्युनिस्ट पार्टी के नेता से दस अनुरोध' है.

इसमें बताया गया है कि किसी तरह समान मताधिकार की कमी से शहर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नुकसान होगा.

इस विज्ञापन को प्रकाशित करने वालों करीब 70 लोगों का एक समूह प्रमुख है. इनमें हेज फंड मैनेजर, बैंकर और स्टॉक ब्रोकर शामिल हैं.

'ऑक्युपाई सेंट्रल'

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ये सभी लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की वकालत कर रहे नागरिक अवज्ञा आंदोलन 'ऑक्युपाई सेंट्रल' के सदस्य हैं.

अगर बीजिंग केवल वफादार लोगों को 2017 में मुख्य कार्यपालक के चुनाव में वोट देने की इजाजत देता है तो ऑक्युपाई सेंट्रल के कार्यकर्ताओं की योजना है कि वो हाँगकाँग के केंद्रीय वित्तीय जिले को ठप कर सकते हैं.

वो अपनी मांगों के लिए जेल जाने को भी तैयार हैं.

लॉ प्रोफेसर बेनी ताई की फंडिंग से चल रहे इस आंदोलन को लेकर चीन की सरकार ने चिंता जताई है.

बेनी ताई बताते हैं कि इस मांग के चलते वित्तीय उद्योग के कई पेशेवर अपनी नौकरी को भी जोखिम में डालने के लिए तैयार हैं.

आंदोलन की अगुवाई एक वैकल्पिक निवेश फंड के प्रबंध निदेशक एडवर्ड चिन कर रहे हैं और इस विज्ञापन के पीछे भी वो ही हैं.

उन्होंने बताया, "हम वो लोग नहीं हैं जो जुगाड़ पर निर्भर हैं. हम अपनी सफलता के लिए कड़ी मेहनत करते हैं."

एडवर्ड चिन कहते हैं, "हम मुख्यभूमि चीन के अनुचित प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों को लेकर चिंतित हैं. हम मनी लॉड्रिंग को लेकर चिंतित हैं. हम इस शहर में अनुचित प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंतित हैं."

उनके समूह का कहना है कि हाँगकाँग की बढ़ती सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए एक समान और सार्वभौमिक चुनाव प्रणाली जरूरी है.

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, "अगर 2017 में पूर्व चयन या छंटनी के आधार पर एक फर्जी सार्वभौमिक मतदान को लागू किया जाता है, तो तथाकथित सार्वभौमिक मताधिकार एक छोटे समूह का चुनाव होकर रह जाएगा."

उनकी दलील है कि बीजिंग को चाहिए कि वो हाँगकाँग का इस्तेमाल लोकतांत्रिक सुधारों के लिए प्रयोगों के तौर पर करे.

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