दक्षिण कोरियाई नौका से मिले 48 शव

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दक्षिण कोरिया में पिछले दिनों हुए नौका हादसे में खोजी दल को नौका के एक कमरे में 48 लोगों के शव मिले हैं. अधिकारियों ने बताया कि इस कमरे में 38 लोगों के रहने की क्षमता थी.

दक्षिण कोरिया के नौसेना अधिकारियों ने बताया कि इन सभी लोगों ने लाइफजैकेट पहन रखी थी.

खोजी दल के अधिकारियों ने बताया कि नौका के कुल 111 कमरों में से अभी केवल 35 कमरों की तलाशी ली गई है.

तलाशी अभियान की निगरानी करने वाले अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बात का 'पता नहीं' कि बचाव कार्य में कितने दिन लगेंगे.

इस नौका हादसे में अब तक 183 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और कई लोग अब भी ग़ायब हैं.

हादसे के समय नौका में 476 लोग सवार थे. नौका आपात सिग्नल भेजने के दो घंटे के भीतर पूरी तरह डूब गई. कुल 174 यात्रियों को बचा लिया गया है.

हादसे में मारे गए या मृत माने जा रहे अधिकतर लोग सियोल के एक स्कूल के छात्र हैं.

नौसेना के कैप्टन किम जिन-ह्वांग ने दक्षिणी द्वीप जिंदो पर पत्रकारों से कहा कि गोताखोरों के इस अभियान में 'बेहद तनाव भरी स्थिति' के कारण बहुत मश्किल का सामना करना पड़ रहा है.

मुश्किल भरा खोज अभियान

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उधर नौका में सवार लोगों के नाराज़ रिश्तेदारों ने शुक्रवार को मत्स्य विभाग के मंत्री और तटरक्षक बलों के प्रमुख का बचाव कार्य में कथित सुस्ती दिखाने के लिए इन अधिकारियों की निंदा की है.

कैप्टन किम जिन-ह्वांग ने कहा कि मृतकों को खोजने से ज़्यादा मुश्किल है उनके शव को ऊपर लाना.

उन्होंने कहा, "पीड़ित परिवार जो दर्द महसूस कर रहे हैं मैं उसकी सिर्फ़ कल्पना ही कर सकता हूँ."

ख़राब मौसम और सप्ताहांत पर तूफ़ान की आशंकाओं के बीच सरकार ने कहा है कि बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधनों को लगाया जा रहा है.

सरकार के मुताबिक 88 विशेषज्ञ गोताखोर डूबे हुए जहाज़ के तीसरे और चौथे तल पर बने केबिने में लोगों की तलाश कर रहे हैं.

दक्षिण कोरिया की यात्रा पर आए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को सियोल में छात्रों की मौत पर दुख ज़ाहिर किया.

नागरिकों से होने वाली समस्या

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सरकार का यह भी कहना है कि मौके पर मौजूद सैंकड़ों नागरिक गोताखोरों के कारण बचाव अभियान धीमा पड़ रहा है और अब उन्हें अभियान में हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक जहाज़ के मलबे में पहुंचने में कामयाब रहे गोताखोरों की ठंडे पानी में और अंधेरे में घंटों तक तैरने के कारण तबियत ख़राब हो रही है और उनका इलाज चल रहा है.

हादसे की जाँच कर रहे अधिकारी हादसे के की वजह जहाज़ में हुए मरम्मत के काम की भी जाँच कर रहे हैं.

बीतते वक़्त के साथ ग़ायब लोगों के जीवित मिलने की संभावनाएँ भी कम हो रही हैं और इसे लेकर पीड़ित परिवारों का गुस्सा बढ़ रहा है.

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