ओपरा विनफ़्रे ने खोली चाय की दुकान

  • 2 मई 2014
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चाय इन दिनों बिल्कुल उबाल पर है. ये नाचीज़ इन दिनों ऐसी गरमागरम चीज़ बनी हुई कि जिसके हाथ में गई उसकी लॉटरी निकल आती है.

अब मोदी जी को ही देख लीजिए. न जाने कितने दिन उन्होंने चाय की दुकान पर काम किया था, टेबल पर पटका मारा था या ग़ल्ले पर बैठे थे लेकिन बचपन में जो चाय के साथ नाम जुड़ा उसकी बदौलत आज पांचों उंगलियां चाशनी में डूब रही हैं.

देश-विदेश में चाय पर चर्चा हो रही है, भारत से भागे भारतीय चाय की चुस्कियों पर मोदी की जय-जयकार कर रहे हैं और साथ में चुनाव के लिए चंदा भी जुटा रहे हैं. ख़ज़ाना लबालब भर रहा है.

आपने ओपरा विनफ़्रे का नाम सुना होगा. बड़ी मशहूर हस्ती हैं, बड़ों-बड़ों को अपने टीवी शो पर बुलाती हैं, उनकी कहानियां सुनती हैं, ख़ुद रोती हैं फिर उन्हें भी रूलाती हैं.

उनकी पहुंच सीधी ओबामा तक है. कहते हैं कि ओपरा के शो में अगर आपको बुला लिया गया तो आपने ज़िंदगी में अपना मुक़ाम हासिल कर लिया.

मैं उनकी शान में क़सीदे इसलिए गढ़ रहा हूं क्योंकि इतनी मशहूर हस्ती ने भी अब चाय की दुकान खोल ली है.

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वो जय जवान टी स्टॉल या गंगा ढाबा जैसी दुकान नहीं, लाखों डॉलर वाली दुकान है. चाय बिक रही है कॉफ़ी के लिए मशहूर स्टारबक्स में और नाम है ओपरा चाय.

सियाटल में जब उन्होंने स्टारबक्स के साथ मिलकर इस चाय का ब्रांड शुरू करने का एलान किया तो जो भीड़ जुटी थी वो मोदी की चुनावी रैलियों से कम नहीं थी.

और ओपरा ने जिस तरह से पूरा ज़ोर लगाकर ''ओपराआआआआ चाय'' का नारा बुलंद किया, उससे हमारे ट्रेन स्टेशन पर ''चाय गरम'' की पुकार लगाने वालों को कुछ सीख लेनी चाहिए.

चांदनी चौक पर ठेला लगाकर हर माल दो सौ रूपए की रट लगाने वाले भी सबक ले सकते हैं. यार सामान ऐसे बेचो कि दुनिया हिल जाए.

तीन सौ की चाय? दिमाग़ ख़राब है?

ऑफ़िस के बग़ल वाली स्टारबक्स पर मैं भी पहुंचा ये सोचकर कि इतनी नामचीन हस्ती ने चाय बनाई है, ज़रा चुस्की लेकर देखते हैं.

ओपरा चाय की तस्वीरें लगी हुई थीं. कीमत सिर्फ़ चार डॉलर पचहत्तर पेंस, टैक्स के साथ पांच डॉलर. रूपए में हिसाब लगाया तो साढ़े तीन सौ-चार सौ का हिसाब बन रहा था.

इंडियन मिडिल क्लास सोच ने अंदर से सवाल दागने शुरू कर दिए. तीन सौ की चाय? दिमाग ख़राब है?

लाइन काफ़ी लंबी लगी हुई थी, सारे ओपरा चाय के लिए ही खड़े थे, ये तो नहीं मालूम लेकिन मैने वहां से कटने में ही भलाई समझी.

स्टारबक्स की भेजी प्रेस रिलीज़ में आकर देखा कि क्या ख़ास है इस अमरीकी चाय में. इस चाय में दालचीनी है, इलायची है, अदरक है, लौंग है और एक-दो और जड़ी बूटियों के नाम हैं जो मैंने नहीं सुने थे. हां, चाय-पत्ती भी है.

मुझे लग रहा था जैसे बस उसमें राजमा और चावल डालना बाक़ी रह गया था.

कुल मिलाकर इतना समझ लीजिए कि कड़क मसाला चाय बिक रही है ओपरा चाय के नाम से!

हाल ही में बीबीसी पर ही पढ़ा था कि मोदीजी के बिल्कुल ख़ास समझे जाने वाले अमित शाह को भी कड़क मसाला चाय ही पसंद है.

लेकिन अगर आपको ये लग रहा हो कि मोदी या उनकी टीम से प्रभावित होकर ओपरा ने चाय की दुकान खोली है तो आप ग़लत हैं.

क्या ज़रूरत थी ओपरा को चाय पिलाने की

ओपरा ने अपने वीडियो इंटरव्यू मे कहा कि वो 2012 में भारत गई थीं और मुंबई में एक परिवार ने उन्हें मसाला चाय पिलाई थी और तब से वो इस चाय की फ़ैन बन गईं और ये ब्रांड शुरू कर दिया.

वैसे सुना है कि अख़बार वाले मुंबई में उस परिवार तक भी पहुंच गए और पता चला कि उन बेचारों को ओपरा की कमाई से एक ढेला भी नहीं मिलने वाला.

वैसे अपने देसियों को कभी अकल नहीं आएगी. अब क्या ज़रूरत थी ओपरा को चाय पिलाने की.

मसाला चाय की आज अमरीका में क़ीमत है चार सौ रूपए, कल यहां पर पेटेंट की अर्ज़ी दाखिल होगी और साथ में ख़बरें छपेंगी कि ओपरा की चाय सेहत के लिए कितनी फ़ायदेमंद है.

ओपरा चाय के टीशर्ट बंटेगे, टीवी पर चौबीसों घंटे इश्तहार चलेंगे. जो अमरीका अच्छा-भला कॉफ़ी पी रहा है उसे चाय की लत लगा दी जाएगी. चाय की क़ीमत आसमान चूमेगी.

आयोवा यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर ने पहले से ही हिंदुस्तानी चाय पर किताबें लिख रखी हैं. उसके बाद तो यहां थिंक टैंक्स और कांग्रेस में भी चाय पर बहस होने लगेगी.

बस आप चाय की जगह गरम पानी पीएंगे और इसके पहले कि ऐसा हो जाए, उठिए और जो भी चाय आपको पसंद हो—मलाई मार के या इलायची वाली—बस सुड़क डालिए.

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