एक मदरसा जहाँ ट्रांसजेंडर पढ़ते हैं...

  • 2 मई 2014
नमाज पढ़ते इंडोनेशिया के नागरिक

ऐसी ख़बरें हैं कि इंडोनेशिया के जावा द्वीप के योग्यकर्ता शहर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए इस्लामी रीति-रिवाज़ वाला एक स्कूल खोला गया है.

ख़बर के मुताबिक यह एक बोर्डिंग स्कूल होगा जहाँ छात्र रह भी सकेंगे. स्थानीय लोग इस स्कूल को 'पेसांत्रेण वारिया' के नाम से जानते हैं. इंडोनेशिया में यह अपनी तरह का पहला और अनोखा स्कूल है.

(एक मदरसा ऐसा भी...)

हालांकि इसकी शुरुआत 2008 में ही हो गई थी लेकिन पिछले महीने इसके संस्थापक की मृत्यु के बाद यह बंद कर दिया गया था. अब इस स्कूल को एक नई इमारत में शुरू किया जा रहा है.

बताया जाता है कि ये घर शिंत्रा रात्रि का है जो कि समलैंगिकों, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए काम करती हैं.

'जकार्ता पोस्ट' अख़बार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्कूल में 35 छात्रों को इस्लाम की तालीम दी गई है और अब उनके पास काम करने और धन कमाने का एक मौका है.

इससे पहले इस स्कूल में एक ब्यूटी सैलून भी चलाया जाता था और यहाँ से शादियों के लिए पारंपरिक कपड़े भी किराए पर दिए जाते थे.

धार्मिक सहिष्णुता

इंडोनेशिया के 'ब्रदरहुड फ़ोरम ऑफ़ द फ़ेथफ़ुल' से जुड़े एक नेता अब्दुल मुहैमिन ने बताया, "क़ुरान में कहा गया है कि हमें लोगों को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, लैंगिक या आध्यात्मिक आधार पर बाँटने की इजाज़त नहीं है."

(मदरसे के कर्मचारियों में नाराजगी)

अब्दुल मुहैमिन का संगठन धार्मिक सहिष्णुता को प्रोत्साहित करता है. उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में कहा, "मुझे उम्मीद है कि यहाँ के छात्र इतने मज़बूत होंगे क्योंकि उन्होंने समाज में बड़ी परेशानियाँ झेली होंगी."

'द जकार्ता ग्लोब' की रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोनेशिया में जनमत 'एलजीबीटी' समुदाय या समलैंगिकों, बाइसेक्सुअल लोगों और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के सख़्त ख़िलाफ़ है.

इस रिपोर्ट में प्यू रिसर्च सेंटर के एक अध्ययन का भी हवाला दिया गया है.

'ग्लोबल डिवाइड ऑन होमोसेक्सुअलिटी, 2013' नाम से आए इस अध्ययन में कहा गया था कि इंडोनेशिया में 93 फ़ीसदी लोग ये सोचते हैं कि समलैंगिक लोगों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

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