चंदा लेकर मना रहे हैं हनीमून, कर रहे हैं सैर

  • 4 मई 2014
हनीमून

शैरोन काइरा को उस वक़्त बेहद ख़ुशी हुई जब उन्हें पता चला कि उनकी जान-पहचान के दो कारोबारियों ने शादी कर ली है.

लेकिन शैरोन का उत्साह उस वक़्त जाता रहा जब उन्हें पता चला कि दुल्हन ने उन्हें नवयुगल दंपत्तियों के 'क्राउडफंडिंग' अभियान से जुड़ा एक लिंक ईमेल पर भेजा. खाते-पीते इस दौलतमंद जोड़े की ख़्वाहिश अफ़्रीका में हनीमून मनाने की है और वे इसके लिए दस हज़ार डॉलर या तकरीबन छह लाख रुपए जुटा रहा है.

क्राउडफंडिंग में लोग अपने सभी जानने वालों और अजनबियों से किसी काम के लिए चंदा देने के लिए कहते हैं.

('हनीमून' पर हंगामा)

शैरोन काइरा कहती हैं, "मुझे लगा, "सचमुच?" मुझे शादी में नहीं बुलाया गया था. और तुम चाहती हो कि मैं अफ़्रीकी सफ़ारी की सैर के लिए तुम्हें पैसे दूं?"

काइरा लास वेगास में एक जनसंपर्क का प्रबंधन करने वाली कंपनी 'काइराकॉम' चलाती हैं. किसी अजीबोगरीब स्थिति बचने के ख़ातिर काइरा ने पचास डॉलर दे दिए. उन्होंने बाद में देखा कि कुछ लोगों ने 250 डॉलर और यहाँ तक कि 500 डॉलर तक की रक़म दी थी. वे हँसते हुए कहती हैं, "मुझे लगा, जाने दो 50 डॉलर ही गए न."

'क्राउडफ़ंडिंग' के जरिए किसी सामाजिक उद्देश्य के ख़ातिर पैसे जुटाए जाते हैं. नई तरह की पत्रकारिता या फिर बुरे वक़्त से गुज़र रहे किसी व्यक्ति की मदद के लिए भी 'क्राउडफंडिंग' के ज़रिए पैसे जुटाए जाते हैं.

खास वेबसाइट्स

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लेकिन आसानी से पैसे पाने के लालच के कारण ये चलन बढ़ता जा रहा है. ख़ासकर अमरीकियों को दोस्तों, रिश्तेदारों और अजबनियों से ग़ैर सामाजिक कार्यों के लिए पैसे मांगते देखा जा रहा है.

(हनीमून मर्डर)

इन कामों में घर की मरम्मत, स्पोर्ट्स कार खरीदना, ज़मानत देना, यात्रा के खर्चे, रियलिटी शो में भाग लेने से लेकर बिकनी पहनकर की जाने वाली मॉडलिंग कॉम्पिटीशन तक के लिए पैसे मांगना शामिल है.

काइरा को ऐसी कई गुज़ारिशें मिलीं जिनमें पैसे की मांग की गई थी. उनसे जिन चीज़ों के लिए पैसे मांगे गए हैं उनमें छुट्टी मनाने से लेकर स्तनों की सर्जरी जैसे कारण शामिल रहे हैं. निजी ज़रूरतों की ख़ातिर 'क्राउडफंडिंग' के जरिए पैसे मांगने का चलन लगातार बढ़ा है. काइरा कहती हैं, "ये कहां ख़त्म होगा?"

निजी ज़रूरतों के लिए पैसे मांगने के इरादे से 'गोफ़ंडमी' नाम से एक वेबसाइट खासतौर पर बनाई गई है. 2013 में इस वेबसाइट ने 'क्राउडफंडिंग' कैंपेन के ज़रिए 128 मिलियन डॉलर जुटा लिए जबकि 2011 में इसने 5.65 मिलियन डॉलर जुटाए थे.

कंपनी के सीईओ ब्रैड डैंपहाउस कहते हैं, "गोफ़ंडमी की सभी कैटगरी में निजी कामों के लिए पैसा मांगा जा रहा है और इसी वजह से कंपनी का राजस्व बढ़ा है."

ईमानदारी पर सवाल

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इस कारोबार में गोफ़ंडमी अकेली वेबसाइट नहीं है. 'किकस्टार्टर' और 'इंडीगोगो' जैसी वेबसाइट भी हैं जो कला, कारोबार और परोपकार के लिए चंदा देने वालों पर फोकस करती हैं. 'गिवफ़ॉरवर्ड' बीमारी से जुड़ी ज़रूरतों में पैसा जुटाने काम करता है.

(ये मुलाकात 53 साल पुरानी है...)

लेकिन इससे जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है कि गोफ़ंडमी जैसी वेबसाइट्स लोगों को किस तरह से ईमानदार रख सकेंगी और इस बात की निगरानी कैसी कर सकेंगी कि कोई जोड़ा तंजानिया में ट्रेकिंग करने के लिए मिले पैसों से ट्रेकिंग के बजाय एक नई कार न खरीद ले. हाल ही में पास हुए स्नातकों से लेकर कलाकारों तक के लिए 'क्राउडफ़ंडिंग' पैसा जुटाने का एक अहम ज़रिया बन गया है.

क्रिस्टोफर ओट की उम्र 23 साल है. ओट फ्रीलांस फ़ोटोग्राफ़ी करते हैं और ऑडियो इंजीनियर हैं. वे एक पित्ज़ा रेस्तरां में भी काम करते हैं. एक सेकेंड हैंड लैपटॉप ख़रीदने के लिए उन्हें 800 डॉलर की ज़रूरत थी. वे कहते हैं, "फाइनल बटन दबाने से पहले मैं थोड़ा हिचक गया."

गोफ़ंडमी के संस्थापक मेल्विन बाउज़र जूनियर कहते हैं, "अगर आप चंदा देना चाहते हैं तो सहज भाव से दीजिए और अगर नहीं देना चाहते हैं कोई बात नहीं, मत दीजिए. मैं समझता हूं कि सबके अपने-अपने ख़र्चे होते हैं."

हालांकि इन सब के बीच कई बार ऐसा भी होता है कि पैसा किसी कम ज़रूरतमंद की ओर खिसक जाता है.

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