नाइजीरिया में अगवा स्कूली बच्चियों को बेचने की धमकी

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नाइजीरिया के इस्लामी चरमपंथी संगठन बोको हराम ने उन स्कूली बच्चियों को 'बेचने' की धमकी दी है जिनका अपहरण संगठन ने तीन हफ्ते पहले किया था.

14 अप्रैल की रात को नाइजीरिया के बोरनो शहर में चिबोक के एक स्कूली छात्रावास से कुछ लड़कियों को बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया था.

समाचार एजेंसी एएफपी को चरमपंथी नेता अबू बकर शेकाऊ का भेजा हुआ एक वीडियो मिला है. इस वीडियो में अबू बकर ने पहली बार स्वीकार किया है कि उनके संगठन ने स्कूली बच्चियों को अगवा किया है.

अगवा की गई 230 स्कूली बच्चियां अब तक लापता हैं. नाइजीरिया सरकार की चौतरफा निंदा हो रही है.

पश्चिमी शिक्षा पर पाबंदी

बोको हराम विद्रोह के कारण साल 2009 से अब तक सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं.

बोको हराम का मतलब 'पश्चिमी शैली की शिक्षा पर पाबंदी' से है. उत्तरी नाइजीरिया में हाल के दिनों में इसकी वजह से अनगिनत शिक्षण संस्थानों को चरमपंथी हमले का निशाना बनना पड़ा है.

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अबू बकर शेकाऊ ने वीडियो के जरिए संदेश दिया है कि लड़कियों को शादी कर लेनी चाहिए, क्योंकि उनकी पहली जगह स्कूल में नहीं है.

अबू बकर आगे कहते हैं, "ईश्वर ने मुझे उनका सौदा करने का आदेश दिया है, वे ईश्वर की संपत्ति हैं और मैं उसके आदेश का पालन करूंगा."

हालांकि बीबीसी हौसा सेवा के संपादक मंसूर लाइमन ने इस बात की ओर ध्यान खींचा है कि बोको हराम नेता ने न तो अगवा की हुई बच्चियों की संख्या बताई है, न ही वे जहां ले जाई गईं है उस ठिकाने के बारे में बताया है और न ही वे फिलहाल कहां है इसके बारे में बताया है.

बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार नाइजीरिया के राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन की ओर से दिया गया आश्वासन नाइजीरिया के लोगों को ये दिलासा दिलाने में नाकाम साबित हो रहा है कि सरकार अगवा हुई बच्चियों को छुड़ाने के लिए कटिबद्ध है.

प्रदर्शनकारी महिला गिरफ्तार

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नाइजीरिया में इस घटना के प्रति लोगों में रोष है. नागरिकों की ओर से कई जगह सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

इसी सिलसिले में एक महिला को पहले गिरफ्तार किया गया फिर बाद में छोड़ दिया गया. उस महिला पर विरोधियों को संगठित करने का आरोप है.

महिला का नाम है, नाओमी मुताह. मुताह चिबोक समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं और वे पिछले हफ्ते से अबूजा में संसद के सामने प्रतिरोध का आयोजन कर रही थीं.

मुताह और उनके जैसे कई विरोधियों का मानना है कि सरकार अगवा हुई बच्चियों को तलाशने में ढिलाई बरत रही है.

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अगवा हुई अधिकांश बच्चियों की उम्र 16 से 18 साल है.

मुताह का कहना है कि उन पर सरकार की ओर से बोको हराम का समर्थक होने का आरोप भी लगाया जा रहा है.

रविवार को एक टीवी प्रसारण में राष्ट्रपति जोनाथन ने पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए कहा था कि वे नहीं जानते कि बच्चियां कहां है, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें खोजने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

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