सुचित्रा सेन के पुश्तैनी मकान से हटेगा क़ब्ज़ा

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बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को मशहूर बांग्ला फ़िल्म अभिनेत्री सुचित्रा सेन के पाबना स्थित पुश्तैनी मकान को सरकार के अधिकार में सुरक्षित रखने का रास्ता साफ़ कर दिया.

जमात-ए-इस्लामी समर्थित इमाम गज़ाली ट्रस्ट ने दो दशकों से पाबना के गोपालपुर में सुचित्रा सेन के पुश्तैनी मकान को अपने क़ब्ज़े में ले रखा है.

यह ट्रस्ट इस इमारत में इमाम गज़ाली संस्थान नाम से छोटे बच्चों की एक संस्था चलाता है.

सुचित्रा सेनः मौत के बाद 'मायका' विवादों में

सुचित्रा, जिनका असल नाम कृष्णा दासगुप्ता था, ने अपने परिवार के साथ 1947 के बंटवारे से कुछ महीने पहले ही पाबना छोड़ दिया था और भारत में बस गईं थीं. सुचित्रा सेन का इसी साल जनवरी में निधन हो चुका है.

इमाम गज़ाली ट्रस्ट ने सुचित्रा सेन के मकान को सरकारी क़ब्ज़े में देने के बांग्लादेश के हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी जिसे रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

बेदख़ल

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को स्कूल के लिए वैकल्पिक जगह आवंटित करने की ट्रस्ट की मांग को भी ख़ारिज कर दिया.

अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल मुराद रज़ा और डिप्टी अटॉर्नी जनरल एकरामुल हक़ तुतुल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि इमाम गज़ाली ट्रस्ट को मकान से बेदखल करने के इस फ़ैसले के बाद अब सरकार के सामने कोई क़ानूनी अड़चन नहीं है.

'धीरे से, कहीं उन्हें चोट न लग जाए'

उन्होंने यह भी कहा, "सरकार मकान का इस्तेमाल अब सुचित्रा सेना की यादों को सहजने के लिए कर सकेगी."

पाबना के डिप्टी कमिश्नर काज़ी अशरफ़उद्दीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला मिलते ही वे आवश्यक क़दम उठाएँगे.

इमाम गज़ाली ट्रस्ट के वकील इमरान सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें अपने मुवक्किल से आगे कोई क़ानूनी क़दम उठाने के लिए निर्देश नहीं मिले हैं.

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