नाज़ियों की लूटी गई कलाकृतियों के संग्रहकर्ता की मौत

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'नाजी कला' संग्रहकर्ता कॉमेलियस गुरुलिट की मृत्यु हो गई है. वे 81 वर्ष के थे. वे नाजियों द्वारा जब्त की गई कलाकृत्तियों के गुप्त संग्रह के लिए जाने जाते थे.

जर्मन संग्रहकर्ता गुरुलिट ने ऐसी ही करीब 1,400 कलाकृतियों का संग्रह किया था.

दो साल पहले उनके म्यूनिख स्थित आवास से बेशकीमती कलाकृतियों का जखीरा मिला था जिसमें मतीस, पिकासो और शैगल जैसे नामचीन कलाकारों की कृतियां शामिल थीं.

नाज़ियों ने लगभग सभी आधुनिक कलाओं को पतनशील घोषित कर दिया था. नाज़ी युग में ग़ैर-जर्मन कलाकृति या यहूदी कलाकार की कलाकृतियों पर पाबंदी थी.

इसलिए कुछ कलाकृतियों को ज़ब्त कर लिया गया, कुछ को नष्ट कर दिया गया और कई अन्य को कला संग्रहकर्ताओं को सस्ते दामों पर बेच दिया गया था.

कॉमेलियस गुरुलिट एडोल्फ हिटलर के कला कारोबारी हिल्डब्रांड गरलीट्ट के पुत्र थे. ऐसा माना जाता है कि अधिकांश पेंटिंग नाजियों ने लोगों से जबरन हासिल की थी.

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81 वर्षीय गरलीट्ट दिल का बड़ा ऑपरेशन हुआ था. वे इससे उबर नहीं पाए और उनकी बीमारी गंभीर रूप लेती चली गई.

गुप्त संग्रह का जखीरा

पिछले महीने कॉमेलियस गुरुलिट ने जर्मनी अधिकारियों के साथ एक समझौता किया था. तब उन्होंने कहा था कि वे उनके साथ इस बात का पता लगाने में मदद करेंगे कि कौन सी पेंटिंग दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजियों द्वारा चुराई गई थी.

उन्होंने अधिकारियों को आश्वासन दिया था कि जो भी पेंटिंग चुराई हुई पाई जाएगी, उसे लौटा दिया जाएगा और बाकि बची पेंटिंग्स को वे अपने पास रख लेंगे.

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गुरुलिट ने कभी अनाप-शनाप खर्च का शौक नहीं रखा. वे इन कलाकृतियों को एक अँधेरे कमरे में रखते थे और जब पैसों की ज़रूरत होती थी तो एक-एक कलाकृति निकाल कर बेचते थे.

छानबीन करने वालों ने म्यूनिख के उनके आवास से फरवरी 2012 में 1400 से भी ज्यादा कलाकृत्तियां बरामद की थीं. जबकि इस साल के शुरुआती महीने में ऑस्ट्रिया के उनके घर से 60 और कलाकृत्तियों मिलीं.

इनमें पियरे-आगस्ती रेनोर, मार्क चगाल, एमिल नोल्डी और मार्क्स लीबरमन की रचनाएं शामिल थीं.

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बरामद हुई कलाकृतियों की कीमत करीब एक अरब यूरो आंकी गई है.

रहस्यवादी स्वभाव

जर्मन कानून के अनुसार गुरुलिट किसी भी पेंटिंग को उसके मालिक को लौटाने के लिए मजबूर नहीं हैं, क्योंकि स्टेच्यू ऑफ लिमिटेशन के तहत वे सुरक्षित है.

स्टेच्यू ऑफ लिमिटेशन ऐसे किसी भी दावे को खारिज करता है जिसमें कलाकृति की चोरी की घटना घटे 30 साल से ज्यादा हो गए हों.

बीबीसी कला संपादक विल गोमपर्त्ज का कहना है कि ये साबित होने के बावजूद कि ये सारी कलाकृतियां नाज़ियों द्वारा लूटी हुई हैं, गुरुलिट उन्हें अपने पास रख सकते थे.

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लेकिन अब उनकी मौत हो जाने का असर निश्चित रूप से इस मामले पर पड़ेगा.

गुरुलिट का स्वभाव बेहद रहस्यवादी होने के कारण उनके सार्वजनिक जीवन के बारे में कोई नहीं जानता. उनका उत्तराधिकारी कौन है, इसकी जानकारी भी किसी को नहीं है.

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