छात्राओं के अपहरण पर चुप न बैठे दुनिया: मलाला

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पाकिस्तान में तालिबान के जानलेवा हमले में बचीं स्कूली छात्रा मलाला यूसुफ़ज़ई ने कहा है कि अफ़्रीकी देश नाइजीरिया में 200 से अधिक छात्राओं के अपहरण के मामले में दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''अगर हम चुप रहे तो इस तरह की घटनाएं बढ़ती जाएंगी.''

इन छात्राओं को इस्लामी चरमपंथी संगठन बोको हराम ने उत्तर पूर्वी राज्य बोर्नो में तीन हफ़्ते पहले अगवा कर लिया था.

लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चलाने पर तालिबान ने साल 2012 में मलाला यूसुफ़ज़ई के सिर में गोली मार दी थी.

ब्रिटेन में महीनों के पुनर्वास और ऑपरेशन के बाद 16 साल की मलाला यूसुफ़ज़ई की जान बच पाई थी. अब वो दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चला रही हैं.

अफ़्रीकी देशों की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने भी अगवा लड़कियों की रिहाई के लिए कार्रवाई की अपील की है. अगवा लड़कियों को बचाने के लिए तेज़ी से प्रयास न करने के लिए अन्नान ने नाइजीरिया सरकार और अन्य अफ़्रीकी देशों की आलोचना की है.

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उन्होंने इन लड़कियों की रिहाई के लिए सभी अधिकारों का प्रयोग करने की अपील की है.

बुधवार से नाइजीरिया के शहर अबूजा में शुरू हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम पर इस मामले का साया रहा है.

अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने लड़कियों को छुड़ाने के लिए विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं.

बोको हराम पर बोर्नो राज्य में सोमवार को एक और हमला करने का आरोप लगाया गया है. इसमें क़रीब तीन सौ लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

वहां के निवासियों का कहना है कि गमबोरु नगाला में बंदूकधारियों ने पहले अफ़वाह फैलाई कि अगवा लड़कियों को कहीं और देखा गया है. इससे सुरक्षा बल शहर छोड़कर चले गए और शहर में भगदड़ मच गई.

मलाला यूसुफ़ज़ई ने नाइजीरिया की अगवा लड़कियों को अपनी बहनें बताया और कहा कि वे एक तरह की जेल में बंद हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का एक ही रास्ता है और वह यह कि इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जाए.

उन्होंने बोको हराम को चरमपंथियों का समूह बताते हुए कहा कि वे इस बात को नहीं समझते हैं कि इस्लाम कहता है कि उसे मानने वालों का यह कर्तव्य है कि वे ख़ुद को शिक्षित करें और दूसरों के प्रति सहिष्णु और उदार बने.

पढ़ाई के ख़िलाफ़

बोको हराम के नेता ने हाल में यह स्वीकार किया है कि उनके लड़ाकों ने इन लड़कियों को अगवा किया है, जिनमें से अधिकतर की आयु 16 से 18 साल के बीच है. इन लड़कियों का 14 अप्रैल को चीबोक कस्बे से अपहरण कर लिया गया था.

बोको हराम के नेता अबुबकर शेकू ने इन लड़कियों को 'बेचने' की धमकी दी है. उनका कहना है कि इन लड़कियों को स्कूल में नहीं होना चाहिए बल्कि शादी कर लेनी चाहिए.

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चरमपंथियों के जंगल में स्थित ठिकाने के पास स्थित दो गांवों पर रविवार रात हुए हमले के बाद 11 अन्य लड़कियों को भी अगवा कर लिया गया.

अपहरण की इन घटनाओं की वजह से नाइजीरिया सरकार की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई और लोगों ने प्रदर्शन किया.

इस घटना को हृदयविदारक और घृणित बताते हुए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसकी निंदा की है.

अभियान

वहीं अमरीका की पहली महिला मिशेल ओबामा भी इसके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में चलाए जा रहे एक अभियान में शामिल हैं. उन्होंने एक तस्वीर ट्वीट की है, जिसमें वो तख्ती लिए हुए दिख रही हैं, जिस पर लिखा है, ब्रिंग बैक ऑवर गर्ल्स यानी हमारी लड़कियों को वापस लाओ.

इन अगवा लड़कियों के बारे में किसी भी तरह का सुराग देने वालों के लिए नाइजीरिया की पुलिस ने तीन लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की. कुछ लोग इस पहल की यह कहते हुए आलोचना कर रहे हैं कि आख़िर इसमें इतनी देर क्यों की गई.

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में हिस्सा लेने गए चीनी प्रधानमंत्री ने भी लड़कियों की रिहाई के लिए सहायता की पेशकश की है.

बोको हराम का हौसा भाषा में अर्थ होता है पश्चिमी शिक्षा हराम है. इस संगठन ने 2009 में विद्रोह की शुरूआत की थी.

एक अनुमान के मुताबिक़ इस साल हिंसा में अब तक एक हज़ार लोगों की जान जा चुकी है.

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