ईरानः निर्णायक परमाणु समझौते की ज़मीन तैयार

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अब तक ईरान और जर्मनी के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के बीच परमाणु वार्ता एक अंदरूनी सूत्र के शब्दों में "जमीन तैयार करने वाली" रही है.

इस हफ़्ते विएना में सही मायनों में बातचीत शुरू होने जा रही है.

13 मई को होने वाली इस वार्ता में एक वास्तविक समझौते का मसौदा तैयार करने की कोशिश की जाएगी जो ईरान के परमाणु मुद्दे का एक व्यापक समाधान प्रदान करेगी.

इस जुलाई के अंत से पहले इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा किया जाना है जो कि छह महीने की अंतरिम समझौते के समाप्त होने पर होगा.

इस पर गहन विचार विमर्श के लिए आगे और तीन महीने लगेंगे. अगर सब कुछ सही रहता है तब बिल्कुल विस्तार संभव है.

बातचीत

लेकिन अगर समझौता नहीं हो पाता है तो इसके परिणाम गंभीर होंगे.

विशेषज्ञ और कूटनीतिज्ञ इस मामले में एकमत है कि अब तक की बातचीत आश्चर्यजनक रूप से सही दिशा में रही है.

कार्नेगी एनडाउमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस के परमाणु विशेषज्ञ मार्क हिब्स कहते हैं, " बातचीत में हुई कठिनाइयों के बारे में प्रेस में अनधिकृत रूप से नहीं बताना और वार्ताकारों का संयम सकारात्मक संकेत है कि दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छा शक्ति मामले को अंत तक पहुँचाने की है. "

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लंदन में सामरिक अध्ययन के अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आईआईएसएस) में अप्रसार और निरस्त्रीकरण कार्यक्रम के निदेशक मार्क फ़िट्जपैट्रिक ने कहा, '' अब तक बहुत अच्छा. अंतरिम समझौता सम्मानजनक तरीके से हो रहा है और एक व्यापक समझौते पर वार्ता से अच्छे संकेत मिल रहे हैं. सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ पेश आ रहे हैं. ''

विश्वास

हिब्स कहते हैं, " दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास में कमी सबसे बड़ी चुनौती थी. दोनों पक्षों में बातचीत विश्वास बहाली के उपायों के साथ शुरू हुआ. "

यह किसी भी समझौते की प्रवृति को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है. ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों या शोधों से जो जानकारी हासिल की है उसे खत्म करना आसान नहीं है.

इसलिए एक ऐसे समझौते पर पहुंचना संभव नहीं है जिसमें यह कहा जा सकता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने में सक्षम नहीं होगा.

इसलिए पश्चिमी देशों के लिए एक कामयाब समझौता वह होगा जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने के ईरान के किसी भी कोशिश को पकड़ सके और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह पता लगा पाए कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने में कितना समय लगेगा.

सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान में परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता किस हद तक है और ईरान के " परमाणु बम बनाने " के पहले चेतावनी की गंभीरता पर निर्भर करेगा.

कई आशंकाओं के बावजूद एक साल पहले पश्चिमी कूटनीतिज्ञों का विश्वास है कि समझौता बिल्कुल संभव है. लेकिन वे जोर देकर कहते हैं कि समझौता बहुत हद तक ईरान पर निर्भर करता है.

बातचीत की मेज पर मौजूद समझौते के विवरण बहुत जटिल है.

ईरान का कहना है आईआर-40 अराक रियक्टर बिजली उत्पादन के लिए है लेकिन इसमें इस्तेमाल ईंधन को फिर से प्रोसेस करके प्लूटोनियम बनाया जा सकता है जो ईरान को परमाणु बम बनाने का विकल्प देता है.

विस्तार

फ़िट्जपैट्रिक का मानना है कि मुद्दों की जटिलता की वज़ह से बातचीत जुलाई से आगे भी जारी रहेगी.

उनका कहना है, " इसकी संभावना बहुत कम लगती है कि दोनों पक्ष इस विवादास्पद मुद्दे को 20 जुलाई तक निपटा लेगे. बहुत संभव है कि वे और छह महीने के लिए समझौते को बढ़ाएंगें. "

लेकिन उनका कहना है कि अभी विस्तार की बात करना जल्दबाजी होगा. बातचीत में विस्तार भी कुछ कठिन मुद्दों को उठा सकता हैं.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में बातचीत में कोई भी विस्तार सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए. संभव है कि यह इस बात का संकेत हो कि मामले में प्रगति हो रही है और अंतिम उद्देश्य अभी भी नज़र आ रहा हो.

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