तुर्की खदान हादसा: ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल बुलाई

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तुर्की में ट्रेड यूनियनों ने देश के सबसे बड़े खदान हादसे के बाद एक दिन की हड़ताल की घोषणा की है.

पश्चिमी तुर्की के सोमा में कोयला खदान में हुए विस्फ़ोट में मरने वालों की संख्या 274 हो गई है.

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि हाल ही में खदानों के निजीकरण के कारण काम करने के हालात और भी ख़तरनाक हो गए हैं.

बुधवार को तुर्की के कई शहरों में सरकार के ख़िलाफ़ नागरिकों का ग़ुस्सा सामने आया.

ग़ौरतलब है कि सोमा की खदान में हादसे के वक़्त क़रीब 800 खनिक काम कर रहे थे. शॉर्ट शर्किट के कारण हुए धमाके से खनिक खदान में ही फँसे रह गए.

हादसा

ज़्यादातर मौतें ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के फ़ैलने से हुई हैं. जब ज़मीन के दो किलोमीटर भीतर स्थित बिजली का प्लांट धमाके से उड़ गया तो खदान के भीतर हवा पहुंचाने वाले सिस्टम बंद हो गए.

सरकार का कहना है कि 363 खनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. लेकिन बुधवार सुबह के बाद से किसी भी खनिक को ज़िंदा खदान से बाहर नहीं निकाला जा सका है.

खदान में गैस इकट्ठा हो जाने के कारण गुरुवार सुबह राहत और बचाव कार्य को कई घंटों तक रोकना पड़ा.

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बचावकर्मी सैकड़ों लापता खनिकों की खोजबीन में जुटे हैं. ऊर्जा मंत्री तानेर यिल्दिज़ के मुताबिक़ खदान के कई हिस्से अभी भी आग की चपेट में हैं जिसके कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं.

खदान से सुरक्षित बाहर निकाले गए 80 लोगों का इलाज किया गया है. हालांकि किसी की भी चोट गंभीर नहीं है और सभी ख़तरे से बाहर हैं.

हड़ताल

रिवोल्यूशनरी ट्रेड यूनियनों के समूह के प्रमुख ने पत्रकारों को बताया है कि प्रमुख ट्रेड यूनियनें हड़ताल के लिए तैयार हो गई हैं.

आरज़ु चर्केज़ोगलू ने नागरिकों से भी काली पट्टी बाँधकर श्रम मंत्रालय तक मार्च में शामिल होने की अपील की.

एक अन्य ट्रेड यूनियन समूह पब्लिक वर्कर्स यूनियन कनफ़ेडेरेशन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "जो लोग निजीकरण करते हैं, नीतियाँ बनाते हैं, ख़र्च कम करने के लिए कामगारों की जान ख़तरे में डालते हैं वे ही सोमा हादसे के ज़िम्मेदार हैं और उन्हें सज़ा दी जानी चाहिए."

सोमा कोयला खदान का साल 2005 में निजीकरण किया गया था.

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तुर्की की विपक्षी पीएचपी पार्टी के एक सांसद ने आरोप लगाया है कि हाल ही में सोमा इलाक़े में होने वाले खदान हादसों की संसदीय जाँच के प्रस्ताव को सरकार ने नकार दिया था.

निरीक्षण

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ श्रम मंत्रालय ने कहा है कि उसके अधिकारी खदानों का नियमित निरीक्षण करते हैं.

तुर्की के प्रधानमंत्री रेजेप ताईप अर्दोआन बुधवार को अपनी विदेश यात्रा रद्द कर घटनास्थल का जायज़ा लेने सोमा पहुँचे जहाँ उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा. लोगों ने उनकी कार को ठोकरें मारीं.

हादसे के बाद सैकड़ों लोगों ने खदान कंपनी के इस्तांबुल स्थित कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.

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