भारत के वंदेमातरम की तरह अब फ़्रांस के राष्ट्रगान पर विवाद

फ्रांस की न्याय मंत्री क्रिश्टियान टूबिरा इमेज कॉपीरइट AFP

एक फ़्रांसीसी मंत्री को राष्ट्रगान याद न रहने के बाद सोशल मीडिया जैसे ट्विटर और फ़ेसबुक वग़ैरह पर पूरे हफ़्ते नस्ल और फ्रांस के राष्ट्रगान को लेकर चर्चा होती रही.

इसकी शुरूआत एक ट्वीट से हुई. हुआ यह कि ग़ुलामी प्रथा के उन्मूलन के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में फ़्रांस की न्याय मंत्री क्रिश्टियान टूबिरा ने राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया. उनके इस फ़ैसले की उनके साथी राजनेता जिओफैराय बोलार्ड ने आलोचना की.

बोलार्ड ने अपने ट्वीट में कहा, ''टूबिरा ने ला मार्सेयेज़ इसलिए नहीं गाया क्योंकि उन्हें 'रेज़िग्नेशन' शब्द का अर्थ पता नहीं हैं.''

बहस की शुरुआत

इसके बाद कुछ दिनों तक ट्विटर पर हैशटैग ला मार्सेयेज़ के साथ बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों के मुताबिक़ क्रिश्टियान टूबिरा एक विवादित व्यक्ति हैं, जो कट्टरपंथी वाम से जुड़ी हैं. उन पर राष्ट्रगान को राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए जानबूझकर न गाने का आरोप लगाया गया. वहीं अन्य लोगों ने कहा कि टूबिरा पर किए जा रहे हमले नस्लीय हैं (वह फ्रेंच गुयाना में पैदा हुईं एक अश्वेत महिला हैं.)

राष्ट्रगान न गाने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए क्रिश्टियान टूबिरा पर कहा, ''कुछ अवसर मंच पर गाने की तुलना में ध्यान खींचने के लिए बहुत अच्छे होते हैं.''

लेकिन उनके इस बयान से भी तनाव कम नहीं हुआ और हैशटैग #कारोकेडिसट्रेड ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. इसमें टूबिरा की और आलोचना होने लगी.

जीन पॉल फ्यूर्निये ने लिखा, ''क्रिश्टियान टूबिरा वाम की प्रतीक हैं, जो फ्रांसीसी देशभक्तों के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखातीं #कारोकेडिसट्रेड. ''एक और व्यक्ति ने ट्विट किया, ''नहीं गाना एक बात है, लेकिन इस तरह के शब्द स्वीकार्य नहीं हैं #कारोकेडिसट्रेड.''

अति दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल फ्रंट के नेता मैरीन ली पेन भी इन आलोचनाओं में शामिल हो गए. वहीं अन्य लोगों ने सार्वजनिक जगह पर राष्ट्रगान बजाए जाने पर उसे न गाने वाले राष्ट्रपति समेत बड़ी-बड़ी राजनीतिक हस्तियों की तस्वीरें शेयर कर क्रिश्टियान टूबिरा का बचाव किया.

क्या जाति या नस्ल इस वाद-विवाद में एक कारक था? इस बहस की शुरुआत करने वाले मध्य दक्षिणपंथी नेता जिओफैराय बोलार्ड ने बीबीसी से कहा, ''किसी का श्वेत या अश्वेत होना समस्या नहीं है. यह कोई नस्लीय ट्वीट नहीं है. यह राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रीय गौरव का मामला है.''

पुराना विवाद

इमेज कॉपीरइट Reuters

दरअसल फ्रांस के राष्ट्रगान ला मार्सेयेज़ को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. फ्रांसीसी फ़ुटबॉल खिलाड़ियों की अक्सर इसे दिल से न गाने को लेकर आलोचना होती रहती है. वहीं अन्य के लिए, वास्तविक समस्या राष्ट्रगान ख़ुद है.

इस राष्ट्रगान को 1792 में विदेशी सेनाओं का मुक़ाबला कर रहे फ्रांसीसी सैनिकों को एकजुट करने के लिए लिखा गया था.

इसमें एक वाक्यांश है, ''अशुद्ध रक्त हमारे खेतों की सिंचाई करे.'' बहस की शुरुआत बुधवार को तब हुई, जब फ़्रांसीसी अभिनेता लैंबर्ट विल्सन से हालिया विवाद के बारे में पूछा गया. इस पर उन्होंने गीत के बोलों को 'भयानक, ख़ूनी, नस्लीय और लोगों में डर पैदा करने वाला बताया'. उन्होंने इन्हें बदलने की मांग की.

विल्सन की इस टिप्पणी के बाद #ला मार्सेयेज़ फिर ट्रेंड करने लगा. बहुत से लोगों से विल्सन के विचार से सहमति जताई. वहीं कुछ ने इसे अपराध बताया. एक ट्वीट में कहा गया,'' फ़ैशनपरस्त उदारवादी #ला मार्सेयेज़ पर जितना चाहें थूक लें, लोग अभी भी इससे जुड़े हुए हैं और हम लोकतंत्र में रहते हैं.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार