पाकिस्तान: एफबीआई एजेंट को रिहा करने का आदेश

जोएल कॉक्स, एफबीआई एजेंट, अमरीका इमेज कॉपीरइट AP
Image caption जोएल कॉक्स, तस्वीर में दाएँ नीली शर्ट में. जोएल को कराची हवाईअड्डे पर बंदूक की गोलियों के साथ गिरफ़्तार किया गया था

पाकिस्तान के कराची में एक अदालत ने अमरीका की संघीय जाँच एजेंसी (एफबीआई) के एजेंट जोएल कॉक्स के ख़िलाफ़ बंदूक की गोली रखने का आरोप वापस लेने का आदेश दिया है.

पुलिस ने अदालत को बताया कि सरकार ने सुनिश्चित किया है कि उन्होंने जोएल कॉक्स को 'निजी सुरक्षा' के लिए हथियार रखने के लिए अधिकृत किया था. इसके बाद पुलिस ने जोएल का मामला वापस लेने का फ़ैसला किया.

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कॉक्स को इस महीने के शुरुआत में जमानत पर रिहा किया गया था.

एफबीआई एजेंट कॉक्स को उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब सुरक्षाकर्मियों ने कराची हवाईअड्डे पर उनके सामान से नौ मिमी हैंडगन की 15 गोलियाँ बरामद की थीं.

वो कराची से इस्लामाबाद जा रहे थे. उन्हें चरमपंथ निरोधक क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

अमरीकी सरकार के अनुसार कॉक्स पाकिस्तान में एक अल्पकालिक अभियान पर थे.

तल्ख़ रिश्ते

कॉक्स को 10 लाख पाकिस्तानी रुपए की ज़मानत पर रिहा किया गया था.

पाकिस्तान में काम करने वाले अमरीकी एजेंटों को लेकर पाकिस्तान और अमरीका के रिश्ते पहले भी तल्ख़ हो चुके हैं. जिसके कारण पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाओं को बल मिलता रहा है.

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साल 2011 में उस समय काफ़ी हंगामा हुआ था जब सीआईए के कांट्रैक्टर रेमंड डेविस को लाहौर में दो लोगों को गोली मारने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

रेमंड का कहना था कि कुछ हथियारबंद लोगों ने उनका साथ छीना-झपटी की करने की कोशिश की थी जिस दौरान यह घटना हुई.

डेविस को बाद में रिहा कर दिया गया क्योंकि मृतकों के परिवार वालों ने मुआवज़े की राशि स्वीकार कर ली थी.

इस्लामी चरमपंथियों से संघर्ष में पाकिस्तान अमरीका का सहयोगी रहा है. लेकिन बहुत पाकिस्तानी अमरीका के साथ सहयोग की नीति से नाराज़ रहते हैं.

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