भारतीय पर्वतारोही की तलाश में ख़राब मौसम से बाधा

फ़ाइल फ़ोटो, माउण्ट एवरेस्ट इमेज कॉपीरइट AFP

दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा पर पर्वतारोहण के दौरान लापता होने वाले तीन पर्यटकों का तलाशी अभियान ख़राब मौसम के बावजूद जारी है, यह जानकारी पर्वतारोहरण का संचालन करने वाली एजेंसी ने दी है.

ऑपरेंटिंग एजेंसी, सेवन समिट यालुंग कांग एक्सपिडिशन के प्रमुख मिंग्मा शेरपा ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को ख़राब मौसम के कारण खोज और बचाव का अभियान शनिवार सुबह फिर से शुरू हो सकेगा.

उन्होंने कहा कि वो खुद भी खोज अभियान में समन्वय के लिए पूर्वी नेपाल के ताप्लेजुंग कस्बे में पहुंच रहे हैं.

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मिंग्मा शेरपा ने बीबीसी से कहा, "मैं अभी एक हेलीकॉप्टर से वहां जा रहा हूँ. मैं उम्मीद करता हूँ कि मौसम में बेहतरी आएगी और हम तीनों पर्वतारोहियों की तलाश कर सकेंगे."

लापता पर्वतारोही

नेपाल के पर्यावरण मंत्रालय ने लापता पर्वतारोहियों की पहचान भारत में पश्चिम बंगाल के रहने वाली 35 वर्षीय छंदा ज्ञान और उनके दो नेपाली शेरपा गाइड 23 वर्षीय टेम्बा शेरपा और 28 वर्षीय दावा वोंग्चू के रूप में हुई है. दोनों शेरपा पूर्वी नेपाल के संखुवासवा इलाक़े के रहने वाले हैं.

तीनों पर्वतारोही दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी के करीब एक हज़ार मीटर की नीचे 7,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तीसरे कैंप के पास मंगलवार से लापता हैं. स्थानीय अधिकारियों ने उनको मृत मान लिया है, हालांकि पर्यावरण मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है.

ऑपरेटिंग एजेंसी के प्रमुख शेरपा ने इसे पहले बीबीसी को बताया था कि मंगलवार को शाम चार बजे आसपास तीनों पर्वतारोही बर्फ़ीले तूफ़ान की चपेट में आ गए थे.

तीनों पर्वतारोही कंचनजंगा की यालुंग कांग चोटी पर चढ़ाई करने वाले 13 सदस्यों वाले एक दल का हिस्सा थे.

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करीब 8,586 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कंचनजंगा की चोटी का दृश्य पूर्वी नेपाल और भारत की दार्जिलिंग व सिक्किम क्षेत्र से साफ़ मौसम में दिखाई देती है.

भारत, नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित कंचनजंगा पर्वत की गिनती दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है.

अधिकारियों के मुताबिक़ मौसम की ख़राब परिस्थितियों के कारण इन इलाक़ों में हेलीकॉप्टर से पहुंचने में दिक्कतें हो रही हैं. शेरपा के अनुसार इस दुर्घटना के बाद दल के बाकी सदस्य बेस कैंप में वापस लौट आए थे.

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