पाकिस्तानी नेता अल्ताफ़ हुसैन लंदन में गिरफ़्तार

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लंदन पुलिस ने पाकिस्तान के राजनीतिक दल मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के नेता अल्ताफ़ हुसैन को हवाला मामले में गिरफ़्तार कर लिया है.

उनकी पार्टी ने इसकी पुष्टि की है. हुसैन साल 1991 से लंदन में रह रहे हैं.

उनका कहना है कि पाकिस्तान लौटने पर उनकी जिंदगी को ख़तरा हो सकता है.

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में गड़बड़ी की आशंका की वजह रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. माना जाता है कि कराची में एमक्यूएम का भारी दबदबा है.

तनाव

ब्रिटेन और पाकिस्तान के अधिकारियों ने इससे पहले इस बात की आशंका व्यक्त की थी कि यदि अल्ताफ हुसैन गिरफ्तार होते हैं तो इससे करांची में हिंसा और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि शहर के कुछ हिस्से से गोलियां चलने की ख़बर है. शहर में भारी तनाव है.

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कराची और सिंध सूबे के दूसरे शहरों में लोग दुकानों को बंद कर रहे हैं. लोगों को भय है कि इस ख़बर के और फैलने के बाद हिंसा हो सकती है.

कराची में रहने वाले ताहिर ने बीबीसी को बताया कि मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के समर्थक सड़कों पर गोलीबारी कर रहे हैं. उनका कहना था कि कुछ समर्थक उन दूकानों को जला रहे हैं जो अभी भी खुली हुई हैं.

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एक और निवासी नाबिल का कहना है कि शहर में अल्ताफ हुसैन की गिरफ्तारी को लेकर संशय की स्थिति है जिसके कारण बड़े पैमाने पर भ्रम और अशांति के हालात पैदा हो गए हैं.

कराची में मौजूद ब्रितानी वाणिज्य दूतावास को आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

पार्टी के नेता शहर में एक बैठक कर रहे हैं.

आरोप

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया है कि पार्टी हुसैन की गिरफ्तारी के बारे में किसी तरह की गोपनीयता नहीं बरत रही. लेकिन साथ ही उन्होंने आगे बताया कि अल्ताफ हुसैन बीमार थे और उन्हें मंगलवार को अस्पताल में भर्ती होना था.

बीबीसी संवाददाता ओवन बेनेट्ट-जोंस ने जानकारी दी है कि ब्रितानी अधिकारी अल्ताफ हुसैन, उनकी पार्टी, उनके सहयोगी और परिजनों के साथ पूछताछ कर रहे हैं.

इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं अल्ताफ हुसैन ने टीवी पर पाकिस्तान में हिंसा उकसाने वाला भाषण तो नहीं दिया? हालांकि हुसैन ने इससे इंकार किया है.

उनसे दूसरा सवाल ये किया जा रहा है कि एमक्यूएम ने ब्रिटेन करों का सही ढंग से भुगतान किया है, या नहीं?

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साल 2010 में एमक्यूएम के वरिष्ठ नेता इमरान फारूक की हत्या के बाद एक हाई-प्रोफाइल जांच हुई थी. लेकिन आधिकारिक तौर पर उस मामले में किसी पर आरोप तय नहीं हो पाए थे.

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