वॉशिंगटन में घूमते गिद्ध और सियार

  • 6 जून 2014
ह्वाइट हाउस ओबामा Image copyright AP

पैंट की क़्रीज़ इतनी धारदार कि हाथ लगाओ तो शायद ख़ून निकल आए, स्कर्ट्स इतनी टाइट कि जैसे पहनने के बाद सिली गई हों, जूते ऐसे चमकदार कि चेहरा देखकर शेव कर लो..चलिए ये थोड़ा ज़्यादा हो गया...हाथों में डिज़ाइनर घड़ी, एक से एक महंगे परफ़्यूम और आफ़्टर शेव की खुशबू, चेहरे पर ताज़गी और चमक.

मैं ना तो किसी शादी से लौट रहा हूं, ना ही किसी नाइट क्लब से. दरअसल ये नज़ारा अक्सर कैपिटल हिल के अंदर सिनेटरों के कमरों के बाहर देखने को मिल जाता है.

ये वो लोग हैं जो पहुंच और पॉलिसी दोनों बेचते हैं. वॉशिंगटन में इन्हें लॉबिइस्ट कहा जाता है, आम ज़ुबान में दलाल या बिचौलिया.

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अरबों डॉलर का ये बिज़नेस एक तरह से वॉशिंगटन को चलाने वाला इंजन है. भारत हो, पाकिस्तान हो, सऊदी अरब हो या इसराइल, अमरीकी मलाई में अपने-अपने हिस्से के लिए सभी इन लॉबिइस्ट का सहारा लेते हैं.

आप बम-बंदूक के बिज़नेस में हों, दवा-दारू बेचते हों या फिर हॉलीवुड के सपने- हर मामले पर बनने वाले क़ानून और पॉलिसी की चाबी एक तरह से इन्हीं लोगों के हाथों में होती है. अमरीका के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा, उस पर कैसी चाशनी चढ़ानी है ये इन्हीं सूट-बूट वालों का काम है.

'मरी हुईं आत्माएं'

आपने पेंटागॉन में काम किया हो, व्हाइट हाउस में सलाह देते हों, कांग्रेस के मेंबर रह चुके हों या किसी देश के राजदूत की पोस्टिंग से लौटे हों, इन दफ़्तरों में आपके लिए हमेशा जगह होगी और सरकार में रहकर आपने जितना कमाया, उससे कई गुना ज़्यादा कमाएंगे और अमरीकी क़ानून के तहत ये पूरी तरह से जायज़ भी है.

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मेरे दफ़्तर से सिर्फ़ एक गली छोड़कर है 'के स्ट्रीट' जहां इनके शानदार दफ़्तर बने हुए हैं. वैसे लॉबिइस्ट क्या होते हैं उसका विकीपीडिया नहीं बन रहा हूं आपके लिए. असली मुद्दे पर आता हूं.

हुआ ये कि पिछले दो तीन दिनों से 'के स्ट्रीट' की एक इमारत के ठीक ऊपर दो गिद्धों ने डेरा डाल दिया है. जैसे ही ख़बर फैली तो किसी ने लिखा, "इसमें नई बात क्या है, गिद्ध तो वहां पहले से ही थे. अच्छा, अब पंखों वाले गिद्ध आ गए हैं?"

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किसी और ने ट्वीट किया, "ये पंछी जहां भी कुछ मरता हुआ या सड़ता हुआ देखते हैं, वहां पहुंच जाते हैं."

तीसरे ने लिखा, "ये बेचारे भूखे मर जाएंगे क्योंकि यहां मुर्दे नहीं हैं जिनका गोश्त ये खा सकते हैं, बस आत्माएँ मरी हुई हैं."

आप सोच सकते हैं बेचारे 'के स्ट्रीट' पर काम करने वालों का हाल. कहां तो ये लोग डिक्टेटर हो या डाकू, किसी की भी इमेज चमकाने का दावा करते हैं और यहां उनकी अपनी छीछालेदर हो रही है.

कोई बड़ी बात नहीं कि कोई ये भी मुहिम चला दे कि ''के स्ट्रीट'' का नाम बदलकर गिद्ध स्ट्रीट कर दिया जाए.

ओबामा की परेशानी

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वैसे गिद्ध से तो नहीं लेकिन एक जानवर से इन दिनों ओबामा भी परेशान हैं.

पिछले साल जब कांग्रेस की तरफ़ से बजट पास नहीं हुआ और वॉशिंगटन के सरकारी कर्मचारियों को बिना वेतन घर बैठने को कह दिया गया तो व्हाइट हाउस के कर्मचारियों में भी कटौती हो गई थी.

उन्हीं दिनों मौका देखकर एक सियार व्हाइट हाऊस के अंदर घुस आया और जैसा कि किसी इंसान के साथ होता है, एक बार वो व्हाइट हाऊस में घुस आया है तो निकलने का नाम नहीं ले रहा.

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अमरीकी राष्ट्रपतियों पर तो क़ानूनी पाबंदी है कि आठ साल के बाद हर हाल में उन्हें व्हाइट हाऊस खाली करना है. इस बेशर्म पर तो कोई क़ानून भी नहीं लागू होता.

पिछले आठ महीनों में कई बार उसकी तलाश की कोशिशें हुई हैं कि उसे पकड़ा जा सके, लेकिन ओसामा बिन लादेन और सद्दाम हुसैन को हज़ारों मील दूर जाकर ढूंढ निकालने वाली अमरीकी मशीनरी इस छोटे से भूरे सियार के सामने बेबस नज़र आ रही है.

हाल ही में ओबामा अपने ओवल ऑफ़िस में खड़े होकर बाहर का नज़ारा ले रहे थे कि अचानक यह सियार अपनी झलक दिखाकर फिर ग़ायब हो गया.

ओबामा का घबराना जायज़ है. व्हाइट हाउस के पिछवाड़े मिशेल ओबामा ने सब्ज़ियां उगा रखी हैं. कहीं सियार ने उन्हें नुकसान पहुंचा दिया तो मिशेल का ग़ुस्सा कहां उतरेगा ये तो आपको पता ही है.

वहीं रिपब्लिकन सांसद अब तक सिर्फ़ ओबामा की विदेश नीति को कमज़ोर कह रहे हैं. सियार पर नज़र गई तो कहेंगे होमलैंड सिक्योरिटी पॉलिसी भी ख़तरे में है.

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