अफ़गानिस्तान में मतदान पर छाया रहा हिंसा का साया

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अफ़गानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के निर्णायक दौर का मतदान समाप्त हो गया.

मुख्य मुक़ाबला पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला और विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री अशरफ़ गनी के बीच है.

चुनाव आयोग ने कहा है कि 70 लाख वोटरों ने मतदान में हिस्सा लिया और वोटिंग का कुल प्रतिशत 60 था.

वोटिंग में हिस्सा लेने वालों में एक तिहाई हिस्सा महिला वोटरों का था.

अफ़ग़ान चुनाव आयोग के आधे कर्मचारी धांधली में बर्ख़ास्त

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ जगहों पर मतपत्र कम पड़ गए.

तालिबान ने हमले की धमकी दी थी और ऐसी भी चिंताएं थीं कि यदि धांधली हुई तो विवादास्पद नतीजा आ सकता है.

देखेंः चुनाव की झलकिया

यह पहली बार है कि अफ़गानिस्तान में लोकतांत्रिक तरीक़े से सत्ता का हस्तानांतरण हो रहा है.

इस वर्ष के अंत तक अधिकांश विदेशी सुरक्षा बल देश छोड़ कर जा रहे हैं, इसलिए अगले राष्ट्रपति के सामने कई चुनौतियां होंगी.

चुनौतियां

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तालिबान विद्रोही अभी भी सक्रिय हैं, अर्थव्यवस्था कमज़ोर है, भ्रष्टाचार चरम पर है और बड़े पैमाने पर क़ानून का पालन नहीं होता.

देश में क़रीब एक करोड़ बीस लाख मतदाता हैं. मतदान शनिवार शाम भारतीय समयानुसार पांच बजे समाप्त हो गया, लेकिन आधिकारियों ने क़तार में मौजूद लोगों को वोट देने दिया.

चुनाव आयोग के अनुसार, सुरक्षा के कारण 6,204 मतदान केंद्रों में 160 केंद्र बंद रखने पड़े.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति चुनाव : अब्दुल्ला अब्दुल्ला आगे

कंधार में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने बताया कि महिलाओं ने भारी संख्या में मतदान किया और कुछ केंद्रों पर मतपत्र ख़त्म हो गए थे.

गत अप्रैल में हुए राष्ट्रपति चुनावों के पहले चरण में अब्दुल्ला को 45 प्रतिशत जबकि गनी को 31.6 प्रतिशत मत मिले थे. निर्णय के लिए 50 प्रतिशत वोट पाना ज़रूरी है, इसलिए दूसरे चरण का मतदान कराना पड़ा.

प्रथम चरण में दोनों पक्षों पर चुनाव में धांधली करने के कई आरोप लगे और चुनाव में लगे कई कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई.

जुलाई में नतीजे

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बीबीसी संवाददाता के अनुसार, अफ़गानिस्तान के पहाड़ी और दूरदराज़ के क्षेत्रों में मतपत्र पहुंचाने के लिए हजारों गधों का इस्तेमाल किया गया.

इस चुनाव के शुरुआती नतीजों के दो जुलाई तक और अंतिम नतीजों के 22 जुलाई तक आने की संभावना है.

अफ़ग़ानिस्तान में भारी मतदान से करज़ई गदगद

चुनाव के मद्देनज़र काबुल समेत देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए गए थे. काबुल में अधिकांश कारों की जांच की जा रही थी.

समाचार एजेंसी एएफपी ने गृहमंत्री ओमर दाउद्ज़ी के हवाले से कहा, ''पहले चरण की तुलना में ख़तरा ज़्यादा था, लेकिन हमने अधिक अनुभव और हथियार हासिल कर लिए हैं और किसी भी चरमपंथी हमले को रोकने के लिए बेहतर स्थिति में हैं.''

अधिकारियों का कहना है कि उनकी मुख्य चिंता नतीजों को लेकर है क्योंकि नज़दीकी मुक़ाबले की स्थिति में जो भी हारेगा उनके समर्थक हार नहीं मानेंगे और इससे देश फिर से संभावित जातीय संघर्ष का शिकार हो सकता है.

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