अमरीकाः शलवार-कुर्ते के लिए टैक्सी आयोग पर मुक़दमा

  • 15 जून 2014
राजा नईम, न्यूयॉर्क, मुसलमान टैक्सी चालक

अमरीका के सेंट लुइस शहर में पाकिस्तानी मूल के एक अमरीकी टैक्सी चालक ने शहर के टैक्सी आयोग के ख़िलाफ़ धर्म के आधार पर भेदभाव करने के लिए मुक़दमा दायर कर दिया है.

50 वर्षीय राजा नईम की मुश्किल तब शुरू हुई जब उन्हें टैक्सी आयोग के वर्दी नियम के अनुसार कपड़े पहनने के लिए बाध्य किया गया.

राजा नईम ने सेंट लुइस सर्किट कोर्ट में दायर मुक़दमे में आरोप लगाया है कि टैक्सी आयोग के वर्दी पहनकर टैक्सी चलाने के नियम के कारण उन्हें काम के दौरान अपना धार्मिक लिबास पहनने से रोका जा रहा है, जो बक़ौल उनके, उनकी धार्मिक आज़ादी का हनन है.

राजा नईम कहते हैं, "मैं तो अपने धर्म का पालन करने के साथ अपने परिवार को पालने के लिए नौकरी करना चाहता हूं."

टैक्सी आयोग के वर्दी नियम के अनुसार टैक्सी चालकों को बटन वाली सफ़ेद शर्ट और काली पैंट पहनना अनिवार्य है.

लेकिन राजा नईम शलवार-कुर्ता और सर पर टोपी पहनकर टैक्सी चलाना चाहते हैं.

'धार्मिक आज़ादी का हनन'

राजा नईम कहते हैं कि वह एक मुसलमान होने के नाते सफ़ेद शलवार और घुटने से नीचे तक का कुर्ता पहनकर टैक्सी चलाना चाहते हैं. उनका यह भी दावा है कि यह लिबास इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इसे, बक़ौल राजा नईम के, हज़रत मुहम्मद भी पहनते थे.

लेकिन चूंकि राजा नईम के इस दावे से टैक्सी आयोग सहमत नहीं था, इसलिए आयोग ने ख़ासकर एक मस्जिद के इमाम से इस बारे में जानकारी भी ली कि क्या शलवार और कुर्ता वाक़ई धार्मिक लिबास है.

इसके बाद टैक्सी आयोग ने राजा नईम को रियायत देने की भी बात की, जिसके तहत उन्हें घुटनों से कुछ ऊपर तक का सफ़ेद कुर्ता और काली पैंट पहनने की इजाज़त दी गई.

लेकिन नईम इस पर भी नहीं मानते. वह कहते हैं कि वह तो सफ़ेद शलवार और सफ़ेद कुर्ता ही पहन कर टैक्सी चलाएंगे.

नईम का कहना है कि नियम के अनुसार यूनिफ़ार्म पहन कर टैक्सी न चलाने के कारण उनको 30 से ज़्यादा बार चालान किया जा चुका है. वर्दी के नियम का उल्लंघन करने के कारण दो बार उन्हें पुलिस ने हिरासत में भी लिया और टैक्सी आयोग ने उनका लाइसेंस भी रद्द कर दिया.

वह कहते हैं, "इन्होंने मेरा केस कोर्ट में होने के बावजूद लाइसेंस रद्द कर दिया और पुलिस ने मुझे बग़ैर लाइसेंस के टैक्सी चलाने के लिए भी गिरफ़्तार किया. वर्दी न पहनने के कारण अब तक 32 चालान भी मिल चुके हैं मुझे."

इस हफ़्ते जज रॉबर्ट डियरकर जूनियर की अदालत में दोनों पक्षों ने बहस के दौरान अपना पक्ष रखा.

राजा नईम के वकील ड्रू बाएब्लर ने कहा कि उनके मुवक्किल की धार्मिक आज़ादी का हनन किया जा रहा है.

बाएब्लर कहते हैं, "वह सिर्फ़ अपने धर्म का पालन करते हुए पूरी निष्ठा के साथ अपनी नौकरी करना चाहते हैं. जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें. और यह वर्दी के मामले में वह सिर्फ़ अपने ही नहीं सबकी धार्मिक आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं."

दूसरी ओर टैक्सी आयोग का कहना है कि इस मामले में धर्म पर चलने से कोई नहीं रोक रहा बस वर्दी के रंग में फ़र्क़ का मामला है.

मुक़दमे पर नज़र

टैक्सी आयोग के वकील नील ब्रुनट्रागर का कहना है कि आयोग ने राजा नईम के साथ वर्दी के सिलसिले में पूरी रियायत देने की कोशिश की. वह कहते हैं, "जो चालान उन्हें दिए गए वह धार्मिक लिबास पहनने के लिए नहीं दिए गए. बल्कि वर्दी के नियमानुसार कपड़ों का रंग न होने के कारण दिए गए. और यह नियम ग्राहकों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं."

टैक्सी आयोग का कहना है कि वर्दी का नियम आम जनता की आसानी के लिए लागू किया गया है जिससे लोग मान्यता प्राप्त टैकसी चालकों को आसानी से ढूंढ सकें.

दो दशक पहले पाकिस्तान से अमरीका आने वाले राजा नईम अब सेंट लुइस शहर के मेनचेस्टर इलाक़े में अपनी पत्नी और चार बेटियों के साथ रहते हैं और टैक्सी चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं.

इस बीच शहर भर में टैक्सी चालक इस केस पर नज़र लगाए हुए हैं.

वर्दी के मामले में राजा नईम को साथी टैक्सी चालकों से भी समर्थन मिला है. कई बार शहर के सिटी हॉल के सामने टैक्सी चालकों ने राजा नईम के समर्थन में प्रदर्शन भी किए हैं.

कुछ और पाकिस्तानी मूल के टैक्सी चालकों को भी इंतज़ार है कि अगर शलवार-कुर्ता पहनकर टैक्सी चलाने की इजाज़त अदालत से मिल जाती है तो वह भी शलवार-कुर्ता ही पहनना पसंद करेंगे.

रही बात ग्राहकों की तो राजा नईम कहते हैं कि उनके ग्राहक उनसे ख़ुश हैं.

वह कहते हैं, "मेरे ग्राहक तो कहते हैं कि आप कोई भी लिबास पहनें, हमें फ़र्क़ नहीं पड़ता. बस आप समय पर आ जाते हैं, यही हमारे लिए ज़रूरी है. और वह तो बहुत ख़ुश रहते हैं मुझसे. कभी भी किसी ने कोई शिकायत नहीं की."

अदालती छूट के बाद फ़िलहाल राजा नईम शलवार-कुर्ता ही पहनकर टैक्सी चला रहे हैं.

लेकिन क्या राजा नईम सलवार कुर्ता पहनकर हमेशा टैक्सी चला पाएंगे?

अब इसका फ़ैसला जज को करना है, जो उम्मीद की जा रही है कि एक या दो हफ़्ते में अपना फ़ैसला सुना देंगे.

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