इंडोनेशिया रेड लाइट एरियाः 'हम फिर से सक्रिय हो जाएंगे...'

  • 20 जून 2014
इंडोनेशिया, डॉली लेन, रेड लाइट इलाक़ा Image copyright AFP GETTY

इंडोनेशिया के सूरबाया शहर को दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे रेड लाइट इलाक़ा माना जाता है. अधिकारी इसे बंद करना चाहते हैं, लेकिन यहां रहने और काम करने वाले लोग इस क़दम का विरोध कर रहे हैं.

इसकी शुरुआत 1970 में छोटे-छोटे वेश्यालयों से हुआ था, जो आज सैकड़ों वेश्याओं और दलालों का घर बन गया है.

यह केवल देह व्यापार के फलते-फूलते कारोबार का केंद्र भर नहीं है.

डॉली लेन उपनाम से मशहूर इस इलाक़े के आसपास एक आर्थिक वातावरण विकसित हो गया है.

यह रेड लाइट इलाक़ा स्थानीय निवासियों को रोज़गार और आय मुहैया करवाता है जो भोजन बेचने से लेकर संभावित ग्राहक और मोटरसाइकिल पार्किंग तक का काम करते हैं

(तस्वीरेंः ये है इंडोनशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट इलाक़ा)

'डॉली लेन में पसरा सन्नाटा'

लेकिन अब सरकार इस रेड लाइट इलाक़े में वेश्यावृत्ति को रोकना चाहती है.

इसके लिए अधिकारियों ने बुधवार रात तक की समय सीमा तय की थी. सरकार अब सैकड़ों यौनकर्मियों को इस क्षेत्र से निकालने और करीब 60 वेश्यालयों को बंद करने की योजना बना रही हैं.

लेकिन डॉली लेन को बचाने वाले स्थानीय निवासी और कार्यकर्ता रोज़ाना प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं.

एक स्थानीय निवासी सपुत्रा बताते हैं कि इसके बंद होने से उन्हें नुकसान पहुंचेगा.

अपने व्यवसाय को बारे में बताने से इंकार करते हुए सपुत्रा कहते हैं, "हम गलियों को बंद कर देंगे और हम यहां जो कुछ भी कर रहे हैं, उसे रोकने नहीं देंगे."

डॉली लेन में रात के समय गलियों में काफ़ी हलचल होती है. लेकिन इलाक़े को बंद करने की अटकलों के बीच डॉली लेन के इलाक़े में असामान्य तौर पर सन्नाटा पसरा रहता है.

रेड लाइट इलाक़े में ज़िंदगी

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दर्ज़नों यौनकर्मी बाहर रास्ते पर ग्राहकों के इंतज़ार में टहल रहे थे. एक वेश्यालय के अगले घर में एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ बैठा हुआ था, जबकि अन्य बच्चे फ़ुटबॉल खेलने में मशगूल थे. डॉली में स्थानीय लोग और यौनकर्मी साथ-साथ रहते हैं.

इंडोनेशिया काफ़ी धार्मिक मुसलमानों का देश है, लेकिन वास्तव में इस धंधे ने यहां स्थानीय लोगों को अपने बच्चों और परिवार को पालने के लिए पर्याप्त आय मुहैया करवाई है.

इंडोनेशिया के इंडिपेंडेंट यूथ कम्यूनिटी (केओपीआई) संगठन की अनीसा बताती हैं, "ऐसा अनुमान है कि पूरे इंडोनेशिया में 14,000 लोग डॉली जैसे रेड लाइट इलाकों से होने वाली आय पर निर्भर हैं. हज़ारों बच्चे अपने माता-पिता पर निर्भर हैं, जिनकी आय इस इलाक़े से होती है."

वो कहती हैं, "स्थानीय सरकार ने इस जगह को बंद करने से पहले यौनकर्मियों या स्थानीय लोगों से कोई बातचीत नहीं की."

कुछ यौनकर्मी इसके असर को पहले ही महसूस कर रहे हैं. 38 वर्षीय लिस पिछले 12 साल से इस पेशे में हैं. उनके दो छोटे बच्चे हैं जो अभी स्कूल में पढ़ते हैं.

डॉली लेन की सफ़ाई

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लिस बताती है, "जब मैं छोटी थी, मुझे कभी प्राथमिक स्कूल में भी पढ़ने का मौका नहीं मिला. लेकिन मैं अपने बच्चों का भविष्य खुद से बेहतर बनाना चाहती हूँ. मुझे अपने बच्चों और परिवार के लिए पैसे कमाने हैं. अगर मैं काम नहीं करती तो मैं कोई पैसा नहीं दे सकती."

अपनी आय के बारे में लिस कहती हैं कि वह हर महीने मिलने वाले ग्राहकों के हिसाब से 250 से 800 डॉलर तक कमा लेती हैं. लेकिन वह सारी कमाई अपने पास नहीं रखतीं.

हर ग्राहक से वह तकरीबन 10 डॉलर कमाती हैं, लेकिन इसका आधा हिस्सा ही उनको मिलता है. उनकी कमाई का लगभग पचास फ़ीसदी हिस्सा वेश्यालय के मालिक को जाता है.

इंडोनेशिया में वेश्यावृत्ति अवैध है, लेकिन आजीविका के लिए देह व्यापार पर निर्भर लोगों की संख्या के कारण इस रेड लाइट इलाक़े को बंद करना हमेशा से ही अधिकारियों के लिए एक चुनौती रहा है.

लेकिन सुराबाया के अधिकारियों का कहना है कि वह डॉली लेन की सफ़ाई को लेकर गंभीर है.

'वो चाहते हैं, बंद हो डॉली लेन'

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पूर्वा जावा क्षेत्र के डिप्टी गर्वनर सैफुल्लाह युसुफ़ कहते हैं, "जो लोग गैंग डॉली में नहीं रहते, वह चाहते हैं कि इसे बंद कर दिया जाय."

वह कहते हैं, "यह उनकी इच्छा है, हमारी नहीं. हम केवल इसलिए सहमत हुए हैं क्योंकि हम यहां रहने वाले बच्चों के लिए चिंतित है, जिनके ऊपर देह व्यापार का असर होता है. हम एचआईवी की बढ़ती दर के कारण भी चिंतित हैं."

डॉली लेन के बंद होने से यौनकर्मियों की आय में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार इस क्षेत्र के 1400 यौनकर्मियों में से प्रत्येक को 500 डॉलर की क्षतिपूर्ति दे रही हैं.

अधिकारियों का यह भी कहना है कि वह यौनकर्मियों को अपना पेशा बदलने में सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिलाएंगे.

लेकिन डॉली कम्यूनिटी के लोगों की मदद के लिए सालों काम करने वाले ग़ैर सरकारी संगठन के लोगों का कहना है कि यौनकर्मियों के लिए अपना पेशा बदलना आसान नहीं है.

'हम फिर से सक्रिय हो जाएंगे'

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यायासन अब्दी असीह के निदेशक लिलिक सुलीस्तायोवाती का कहना है, "इनमें से अधिकांश महिलाएं शिक्षित नहीं हैं, इसलिए उनके लिए रोज़गार तलाशना बहुत मुश्किल होने वाला है."

उन्होंने कहा, "हमने उनमें नए कौशल के विकास के लिए काम किया है, लेकिन इसमें समय और धैर्य की जरूरत होती है. इन महिलाओं को ऐसा कौशल सिखाने में कम से कम एक साल लगेगा ताकि वह कुछ और काम करके पैसा कमा सकें. इस दौरान उनके परिवार का क्या होगा?"

इन सबके बीच डॉली लेन में प्रदर्शनों का सिलसिला लगातार जारी है. यहां के स्थानीय निवासी और यौनकर्मी अपने जीवन जीने के तरीके को लेकर अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि इसे रोका नहीं जा सकता है.

सपुत्रा ने कहा, "हम आगे बढ़ते रहेंगे. हमें कोई नहीं रोक सकता. अगर वह हमको रोक भी लेंगे तो यह केवल एक महीने के लिए होगा, केवल रमजान के महीने में. हम हर साल कहीं भी इस महीने में अपना काम रोक देते हैं."

वह कहते हैं, "एक बार उपवास का महीना समाप्त हो जाएगा, हम फिर से सक्रिय हो जाएंगे. डॉली लेन को कोई रोक नहीं सकता."

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