चीन की दुविधाः कुत्ता खाएं या न खाएं

  • 21 जून 2014
डॉग मीट फेस्टिवल

चीन में मध्यवर्ग की जीवनशैली से जुड़ी अन्य चीज़ों की तरह पशुपालन उद्योग भी तेज़ी से फल-फूल रहा है.

एक अनुमान के अनुसार, पशुपालन और वेटनरी का बाज़ार क़रीब 60 अरब रुपए प्रतिवर्ष का है और इसके और तेज़ी से बढ़ने की संभावना है.

जब खाने में परोसा गया चूहे का गोश्त....

ताज़ा चलन क्या है? पांडा जैसे दिखने वाले घुंघराले बालों वाले कुत्ते.

तो इस सप्ताहांत जबकि चीन के यूलिन शहर में डॉग ईटिंग फ़ेस्टिवल का आयोजन हो रहा है, इसे लेकर बड़ी संख्या में नकारात्मक टिप्पणियां हो रही हैं.

देश में मध्यवर्ग के उत्थान से जुड़ी एक और चीज़ है सोशल मीडिया का प्रसार. अब करीब 40 करोड़ लोग अपने स्मार्टफ़ोनों के ज़रिए नियमित रूप से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

तो ऐसे लोग जो इन जानवरों की संभाल नहीं कर रहे हैं वे ट्वीट करने में लगे हैं.

बारासिंघा के गोश्त में मिला था सूअर का मांस

एक उपभोक्ता ने ट्वीट किया, ''क्या आपने कभी देखा है कि सूअर, बत्तख या मुर्गे अपने मालिक की रक्षा करते हैं?''

एक दूसरे उपभोक्ता का कहना है कि जब भी आप घर आते हैं तो क्या मछली आपका दरवाज़े पर स्वागत करती है? कुत्ते अलग होते हैं.

इससे पहले भी यूलिन फ़ेस्टिवल का विरोध होता रहा है, लेकिन इस वर्ष सोशल मीडिया पर पहले की अपेक्षा कहीं तीखा विरोध हो रहा है.

इस विवाद ने विदेशी अख़बारों और प्रसारणों का भी ध्यान आकर्षित किया है.

अंतरराष्ट्रीय एनिमल वेलफेयर संस्थाएं बहुत पहले से कुत्तों के मांस के व्यापार में इस्तेमाल होने वाले क्रूर तरीकों का विरोध करती रही हैं.

विरोध से निपटने के लिए कहा जा रहा है कि इस फ़ेस्टिवल को इस साल एक सप्ताह पहले ही चुपचाप शुरू कर दिया गया और यूलिन में कुछ रेस्तरां के मेनू में 'डॉग मीट' का विज्ञापन भी देना शुरू कर दिया है.

एशिया में कुत्ते का मांस खाने की परंपरा सदियों पुरानी है.

यूलिन फ़ेस्टिवल इसी सप्ताह हो रहा है क्योंकि लोग मानते हैं कि गर्मी में कुत्ते का मांस खाना स्वास्थ्यवर्द्धक होता है.

चूहे के माँस पर इतना हंगामा क्यों?

हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया में भी इसी तरह की बहस चल पड़ी है.

चीन में प्रतिदिन 17 लाख सूअरों का मांस खाया जाता है, जबकि यूलिन फ़ेस्टिवल के दौरान हर साल दस हज़ार कुत्ते खाए जाते हैं.

हालांकि लगता है कि यह सामाजिक दवाब अपना काम करता रहेगा. 2011 में चीन के ज़ेज़ियांग प्रांत ने इसी तरह के फ़ेस्टिवल पर रोक लगा दी थी.

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