पाकिस्तान: सैन्य कार्रवाई में साढ़े तीन लाख बेघर

पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में विस्थापन इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान इलाक़े में पिछले सप्ताह चरमपंथियों के ख़िलाफ़ शुरू हुई सेना की कार्रवाई के बाद से अब तक क़रीब साढ़े तीन लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं.

अधिकारियों ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद क़रीब के क़स्बे बानू में प्रवेश करने के लिए सुरक्षा चौकियों पर बड़ी संख्या में लोगों के इंतज़ार करने की ख़बर है. वहां बसों और लॉरी की लंबी-लंबी क़तारें देखी जा रही हैं.

अब न लौटेंगे शायद

विस्थापितों के बीच पोलियो फैलने का ख़तरा भी जताया जा रहा है क्योंकि ज़्यादातर विस्थापित बच्चों को पोलियो की ख़ुराक़ नहीं मिली है.

ताज़ा सैन्य कार्रवाई कराची हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमले के बाद शुरू हुई.

इन हमलों की ज़िम्मेदारी उज़्बेक चरमपंथी समूह और पाकिस्तानी तालिबान ने ली थी.

भरोसा

इन क़बीलाई इलाक़ों में विस्थापित लोगों में दसियों हज़ार बच्चे शामिल हैं. जिनमें से ज़्यादातर बच्चों को पोलियो जैसी अत्यधिक संक्रामक बीमारी के टीके कभी नहीं मिले हैं, क्योंकि तालिबान ने इन पर प्रतिबंध लगा रखा है.

क्यों घर छोड़कर भाग रहे हैं ये पाकिस्तानी

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि वो इस मानवीय संकट से निपटने के लिए हरसंभव क़दम उठा रहे हैं.

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बानू के पास विस्थापित लोगों के लिए एक शिविर लगाया गया है.

बीबीसी के शाहजेब जिलानी ने इस्लामाबाद से बताया कि ज़्यादातर परिवारों ने ये कहते हुए वहां जाने से इनकार कर दिया है कि वहां पानी, खाना और सफ़ाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.

चुनौती

कई विस्थापितों ने बीबीसी को बताया कि वो ग़ुस्से में हैं क्योंकि सेना मकानों पर बमबारी कर रही है. कई ने माना कि उन्हें भरोसा नहीं है कि पाकिस्तान सरकार उनकी मदद कर सकेगी.

सेना का कहना है कि बीते रविवार से उत्तरी वज़ीरिस्तान के शावल और दूसरे इलाक़ों में हवाई हमलों में कम से कम 160 चरमपंथी मारे गए हैं.

इस इलाक़े में स्वतंत्र मीडिया को नहीं जाने दिया जा रहा है और जानमाल के नुक़सान की पुष्टि करने का कोई तरीक़ा नहीं है.

सेना का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान सीमा के नज़दीक तालिबान और विदेशी चरमपंथी नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए अभियान के तहत टैंकों और सैनिकों को भी भेजा जा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि उत्तरी वज़ीरिस्तान में अभी भी करीब 80 प्रतिशत आबादी उन इलाक़ों में रह रही है, जहां सेना के हमले हो रहे हैं.

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