औरतें जो निभा रही हैं पति बांटने की परंपरा

केन्या, एक साथ रहने वाली तीन पत्नियां, मसाई

पिछले महीने केन्या में बहुविवाह की प्रथा क़ानून बन गई. याल्दा हाकिम ने बीबीसी ऑवर वर्ल्ड के लिए लिखी रिपोर्ट में बताया कि इसे वहां लोग किस तरह देखते हैं.

केन्या की रिफ़्ट घाटी में एक ठंडी सुबह तीन महिलाएं दिन की तैयारी में व्यस्त हैं.

एक नाश्ता तैयार कर रही हैं, दूसरी पैनकेक बना रही हैं और तीसरी चाय बनाने के लिए दूध निकाल रही हैं.

तीन पत्नियां

ख़ास बात यह कि 62 साल की एलिस, 56 साल की जोयसे और 54 साल की जोयसे सारी तैयारी एक ही व्यक्ति के लिए कर रही हैं, अपने पति के लिए, जिनसे तीनों की शादी हुई है.

इनके पति इसाया नटोकाट की उम्र 76 साल है. उनके 15 बच्चे और 48 नाती-पोते हैं.

इसमें कुछ भी असामान्य नहीं. वास्तव में नटोकाट जैसे संपन्न व्यक्ति के लिए तीन पत्नियां अधिक नहीं हैं. केन्या में एक व्यक्ति जितनी महिलाओं से चाहे, शादी कर सकता है.

केन्या में मसाई बहुविवाह को जीवन का हिस्सा मानते हैं और ये महिलाएं अपने पिता को देखती रही हैं, जिन्होंने बहुविवाह किया था.

इनसे उम्मीद की जाती है कि वे भी एक दिन उन महिलाओं के समूह का हिस्सा बन जाएंगी, जो एक पति को साझा करती हैं.

तीनों मिलजुकर रहती हैं, पर पहली पत्नी एलिस को लगता है कि उनके पास बाक़ी के मुक़ाबले ज़्यादा अधिकार हैं.

'हम कहां जा रहे हैं'

सरकार को यह क़दम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि इससे पहले बहुविवाह में महिलाओं को क़ानूनी सरंक्षण नहीं था. पारंपरिक शादियों का विरले ही पंजीकरण होता था. इस कारण अदालत में ऐसी शादियों को मान्यता नहीं मिलती थी.

पति की मौत पर महिलाएं संपत्ति से बेदख़ल हो सकती थीं या बच्चों का अधिकार और वैधता खो सकती थीं.

विधेयक पर चर्चा के दौरान महिला सांसद वांजिकू मुहिया का कहना था, "मैं बहुत निराश हूं. इस क़ानून ने केन्या को 18वीं सदी में धकेल दिया. हम कहां जा रहे हैं, इससे तलाक के मामले बढ़ेंगे."

'स्वार्थी पुरुषों के कारण'

Image caption वेरोनिका कहती हैं कि जब उनके पति माइक दूसरी पत्नी लाए तो वह परेशान हो गईं.

पुरुष सशक्तीकरण समूह चलाने वाले नडेरितू नजोका कहते हैं, "अगर आपकी पहली या दूसरी पत्नी एक पुरुष के रूप में आपका सम्मान नहीं करती, ख़्याल नहीं रखती, खाना बनाती है और बाक़ी सारे काम करती है तो आपको तनावपूर्ण जीवन नहीं जीना चाहिए."

ईसाई नेता राबर्ट बुराले कहते हैं कि नए क़ानून से स्वच्छंद संभोग को बढ़ावा दे रहे हैं और एकल परिवार का अंत कर रहे हैं.

मसाई समुदाय की एक महिला ने कहा, "ऐसा स्वार्थी पुरुषों के कारण हो रहा है, जो कई महिलाओं के साथ रहना चाहते हैं."

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