एक महीने में बग़दाद हमारा होगा: इराक़ी चरमपंथी

इराक़ के अंदर चरमपंथियों का न केवल दबदबा बढ़ रहा है बल्कि चरमपंथी लगातार बगदाद के नज़दीक पहुंचते जा रहे हैं.

इस संघर्ष के बीच कुर्द अपने इलाक़े को इस्लामिक स्टेट इन इराक़ ऐंड अल-शाम यानी आईएसआईएस के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं.

कुर्दों की राजधानी इरबिल शहर ऐसे सुन्नी चरमपंथियों का गढ़ रहा है जो आईएसआईएस संगठन से जुड़े नहीं हैं.

बीबीसी संवाददाता फ्रेगाल कीन ने ऐसे ही दो चरमपंथियों से मुलाक़ात की. दोनों बीबीसी से मुलाक़ात करने के लिए अनबार प्रांत में जारी लड़ाई के क्षेत्र से सीधे इरबिल पहुंचे थे.

इन्होंने दावा किया है कि बग़दाद पर जल्द ही चरमपंथियों का कब्ज़ा होगा.

चरमपंथियों ने बीबीसी से कहा, "समय की बात है, ज़्यादा से ज़्यादा एक महीने की. वे युवा शियाओं को हमारे ख़िलाफ़ लड़ने के लिए तैयार कर रहे हैं. लेकिन हमारा जल्द ही बग़दाद पर कब्ज़ा होगा."

आईएसआईएस से मतभेद

इन चरमपंथियों की मानें तो यह क्रांति आईएसआईएस की नहीं है बल्कि यह सुन्नी समुदाय के लोगों की क्रांति है. हालांकि वे यह मानते हैं कि आईएसआईएस और उसके लड़ाकों ने सुन्नियों की लड़ाई को हाईजैक कर लिया है.

चरमपंथियों ने बीबीसी को बताया, "हम अमरीका और यूरोपीय लोगों को बताना चाहते हैं कि यह आईएसआईएस की क्रांति नहीं है. यह सुन्नी समुदाय की क्रांति है. उन्हें सुन्नी लोगों की मदद करनी चाहिए. हम चरमपंथी नहीं हैं."

सुन्नी समुदाय के इरबिल स्थित राजनीतिक प्रवक्ता डॉक्टर मोहम्मद हमदून ने भी बीबीसी को बताया कि सुन्नी समुदाय आईएसआईएस का विरोध कर सकता है.

हमदून ने कहा, "बगदाद पर कब्ज़े के बाद सुन्नी समुदाय आईएसआईएस के ख़िलाफ़ भी संघर्ष करेगा. आईएसआईएस के अपराधों से सुन्नी प्रभावित रहे हैं, लेकिन उनके ख़िलाफ़ संघर्ष अभी निलंबित है."

उधर अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इराक़ सरकार से सुन्नी समुदाय के लोगों पर ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने कहा, "जब तक इराक़ की सरकार सुन्नी समुदाय के लोगों की समस्याओं का समुचित हल नहीं निकालेगी, दूसरे देशों की मदद से इस संकट का हल पूरी तरह नहीं निकलेगा."

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