इराक़ में फंसी नर्सें कोच्चि पहुंची

इरबिल में घर लौटने का इंतज़ार करतीं नर्सें इमेज कॉपीरइट AFP

इराक़ में फंसी 46 भारतीय नर्सें सही सलामत अपने घर कोच्चि पहुंच गईं हैं. ये सभी नर्सें इराक़ के तिकरित स्थित एक अस्पताल में काम करतीं थीं.

जून के शुरू में इस्लामी चरमपंथी गुट आईएसआईएस ने तिकरित शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया था तभी से ये नर्सें वहां फंसी हुईं थीं.

भारत का विशेष विमान इन नर्सों को लेकर शनिवार सुबह तक़रीबन नौ बजे के आसपास मुंबई पहुंचा. फिर से वहां कोच्चि के लिए रवाना हुआ.

दोपहर 12 बजे के आसपास विमान कोच्चि पहुंचा.

कोच्चि हवाई अड्डे पर परिजनों के अलावा उनका स्वागत करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ओमन चैंडी भी मौजूद हैं.

शुक्रवार शाम विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अक़बरुद्दीन ने कहा था कि नर्सें, शुक्रवार रात को इरबिल से भारत सरकार के विशेष विमान से भारत के लिए रवाना होंगी.

लेकिन कुछ छोटी-मोटी दिक़्क़तों के कारण भारतीय विमान इरबिल से भारतीय समयानुसार शनिवार को सुबह लगभग चार बजे भारत के लिए रवाना हुआ.

एक नर्स श्रुति की बहन कृति ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''हम बहुत ख़ुश हैं. हमें तो यक़ीन ही नहीं हो रहा कि वो वापस आ रही है.''

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Image caption इराक़ में अब भी कई भारतीय फंसे हुए हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

नर्सों के अलावा इराक़ में काम कर रहे लगभग 100 दूसरे भारतीय भी उसी जहाज़ में भारत आए.

भारत लौट रहे और किरकुक में काम करने वाले अमिताभ सिंह ने हवाईजहाज में सवार होने से पहले बीबीसी संवाददाता विवेक राज से कहा, "हमें भारत से आए सात महीने हो चुके हैं. यहां तनख़्वाह और खाने-पीने की बहुत दिक़्क़त थी. हम अपने आसपास बम धमाकों की आवाज़े सुनते थे और धुंआ देखते थे. हम डर गए थे. इसलिए अपनी जान बचाने के लिए हम घर जा रहे हैं."

राजस्थान के सीकर के रहने वाले अमिताभ ने कहा, हमें भारत सरकार ने मदद की लेकिन बहुत धीरे धीरे से किया. सरकार ने हमें बॉर्डर पार करने के बाद मदद किया. बॉर्डर तक हमें कंपनी का आदमी लेकर आया."

अमिताभ और उनके साथी सही-सलामत घर वापस लौटने से ख़ुश हैं और कहते हैं कि अब वे कभी भी इराक़ वापस काम करने नहीं जाएंगे.

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