स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं

  • 4 जुलाई 2014
अमरीका स्वतंत्रता दिवस इमेज कॉपीरइट AP

आप सबको स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं!

जी हां मैं पूरे होशो-हवास में ये मुबारकबाद दे रहा हूं. चार जुलाई है, स्वतंत्रता दिवस है. आप ये दिन कैसे भूल गए?

होमलैंड बिल्कुल दुल्हन की तरह सजा हुआ है. चीन में बने अमरीकी झंडे ऐंठ ऐंठ कर लहरा रहे हैं.

चीन से ही आए पटाखे अमरीकी आसमान को चमका रहे हैं. पार्टियां हो रही हैं, शराब बह रही है, स्कूल दफ़्तर बंद हैं- और क्या सबूत चाहिए आपको कि चार जुलाई को स्वतंत्रता दिवस है.

अच्छा, अब मैं समझा कि आपको क्यों लग रहा है कि मैं बहक गया हूं.

दरअसल ये आपका नहीं आपकी सोच का कसूर है. क्योंकि वो बहुत छोटी है.

आज़ादी

अरे भाई आप दुनिया के नागरिक हैं और दुनिया की आज़ादी की ज़िम्मेदारी अमरीका की है तो अमरीका की आज़ादी आपकी आज़ादी हुई या नहीं?

अब भी आपको लग रहा है न कि मेरे कान के आगे कोई चीनी पटाखा फट गया है और मेरा दिमागी संतुलन बिगड़ गया है.

चलिए थोड़ी देर के लिए मान लीजिए कि पूरी दुनिया एक देश है. उसकी राजधानी क्या होगी? ज़ाहिर है अमरीका. राष्ट्रपति भवन कहां बनेगा? ज़ाहिर है वाशिंगटन में.

इमेज कॉपीरइट AP

आप तो लगता है बुरा मान गए? आप कह रहे होंगे वाशिंगटन में ही क्यों? दिल्ली या इस्लामाबाद या बीजिंग या मॉस्को में क्यों नहीं.

बहुत ख़ूब. कोई छोटी या बड़ी मुश्किल आपके सामने आए तो अपने लीडरों को सीधा भेजते हैं वाशिंगटन.

झगड़ा आपकी गली में हो रहा हो, आप अंकल सैम से पूछ रहे होते हैं कि सुलझाने के लिए कब आ रहे हो.

ग़ुस्सा

उन्होंने आनाकानी की तब ग़ुस्सा, देर की तब ग़ुस्सा, आकर कुछ ज़्यादा दिन ठहर गए तब ग़ुस्सा, कुछ कह दिया तब ग़ुस्सा.

दुनिया में हो रही किसी बात पर ग़ुस्सा आया, चलो अमरीकी झंडा जलाते हैं..

इमेज कॉपीरइट PA

हद होती है किसी चीज़ की भी.

बेचारे अंकल सैम को देखकर मुझे बॉलीवुड फ़िल्मों के शामू काका याद आ जाते हैं. वैसे भी अंकल सैम का अनुवाद करें तो वो शामू काका ही होगा.

शामू काका पानी गर्म नहीं हुआ, शामू काका सब्ज़ी में नमक ज़्यादा है, शामू काका आपको दिखाई नहीं देता....

अब बड़ी मुश्किल से शामू काका अफ़गानिस्तान से काम निपटा कर लौट रहे थे, बचा खुचा काम समेट रहे थे.

इराक़ से बुलावा

सोच रहे थे थोड़ा सुस्ताएंगे, बीड़ी सुलगाएंगे. लेकिन कहां? घर पहुंचे भी नहीं थे कि इराक़ से बुलावा आ गया.

पाकिस्तान में बिजली नहीं आ रही अमरीका को बुलाओ, यूक्रेन को पड़ोस का गुंडा आंखे दिखा रहा है तो अमरीका को बुलाओ, नाइजीरिया में बोको हराम लड़कियों को उठा ले गया है तो अमरीका को बुलाओ, चीन साउथ चाइना सी में उत्पात मचा रहा है तो अमरीका को बुलाओ, सीरिया को आज़ाद करवाना है अमरीका को बुलाओ.

इमेज कॉपीरइट Reuters

और अमरीका भी तन-मन-धन लगाकर जुटा रहता है आपकी खिदमत में.

आपके फ़ोन सुनता है, आपकी चिठ्ठियां पढ़ता है, आपके लिए हथियार बनाता है, आपके नालायक बच्चों को आंखें दिखाता है, लायक बच्चों को अपनी बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाता है, मंहगी-मंहगी दवाएं बनाता है और आप बस बैठकर उन्हें गालियां देते हैं.

कोल्ड कॉफ़ी

थोडा अपना दिल बड़ा करें, सदर बाज़ार जाएं. वहां ज़रूर अमरीकी झंडे मिल जाएंगे--- लहराने के लिए नहीं, पर जलाने के लिए वो ज़रूर उन्हें बेचते होंगे.

इमेज कॉपीरइट AFP

झंडा लहराते हुए बीवी-बच्चों समेत आज़ादी का जश्न मनाएं, मैक्डॉनल्ड्स के बर्गर खाएं, स्टारबक्स भी आपके मुहल्ले तक पहुंच ही गया होगा तो कोल्ड कॉफ़ी पिएं और पैसे बच गए हों तो हॉलीवुड की फ़िल्म देखें.

हां, यहां आने की ज़हमत नहीं उठाईएगा. आजकल आपके हवाई अड्डों पर सेक्योरिटी कुछ ज़्यादा सख़्त कर दी गई है क्योंकि सुना है कुछ सरफिरे फिर से होमलैंड को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

हैप्पी फ़ोर्थ ऑफ़ जुलाई!

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार