स्लोवियांस्क यूक्रेन की फौज के कब्ज़े में

  • 6 जुलाई 2014
स्लोवियांस्क Image copyright AP

विद्रोहियों के गढ़ स्लोवियांस्क पर दोबारा कब्ज़ा किए जाने पर यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने इसे तीन महीने के संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ की शुरुआत बताते हुए इसका स्वागत किया है.

पेट्रो पोरोशेंको ने कहा कि यह पूरी जीत तो नहीं थी लेकिन इस घटनाक्रम का एक बड़ा "प्रतीकात्मक महत्व" है.

युद्धविराम ख़त्म होने के बाद इस हफ़्ते सरकारी सैन्य बलों ने दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों में एक आक्रामक अभियान की शुरुआत की जिसके बाद उसे क्षेत्रीय स्तर की सफलता मिली है.

रूसी समर्थक चरमपंथियों ने अब भी दो क्षेत्रीय राजधानियों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा बनाए रखा है.

लेकिन स्लोवियांस्क को विद्रोहियों का प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है और यह स्वघोषित पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ दोनेत्स्क का सैन्य केंद्र था.

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एक विद्रोही प्रवक्ता ने कहा कि विद्रोही पूरे "उत्तरी क्षेत्र" को खाली कर देंगे और वापस दोनेत्स्क शहर में चले जाएंगे.

विश्लेषण: डेविड स्टर्न, बीबीसी समाचार, कीएफ़

अब तक सरकार मिली जीत में स्लोवियांस्क पर फिर से कब्ज़ा करना और सिटी हॉल के ऊपर यूक्रेन का झंडा लहराना सबसे अहम है.

यह शहर विद्रोहियों का एक मुख्य केंद्र तो था ही साथ ही यह चरमपंथियों की क्षमता का प्रतीक बन चुका था जिसकी बदौलत पूर्वी क्षेत्र में फिर से नियंत्रण करने की कीएफ़ की कोशिशों को विफल किया जाता रहा था.

ऐसा लगता है कि विद्रोही एक दूसरे प्रमुख शहर क्रामातोर्स्क को भी खाली कर रहे होंगे. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ है या फिर यह महज संघर्ष क्षेत्र में एक बदलाव भर है?

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विद्रोही इसे पीछे हटने का एक रणनीतिक कदम कह रहे हैं जो आमतौर पर हार का ही संकेत देता है.

लेकिन अगर वे दोनेत्स्क की तरफ सामूहिक रूप से आगे बढ़ रहे हैं तब वे सैन्य बलों को बड़ी चुनौती दे सकते हैं.

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