दस साल वो उतारता रहा 'उन' फाइलों की नकल

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सोवियत संघ की खुफ़िया एजेंसी केजीबी के एक अधिकारी ने बहुत सी खुफिया जानकारियां 1992 में ब्रिटेन को सौंपी थीं.

इनमें से 19 बॉक्सों को कैंब्रिज विश्वविद्यालय के चर्चिल आर्काइव सेंटर ने सार्वजनिक किया है.

इनमें केजीबी के षड्यंत्रों, हथियारों के ख़ज़ानों और पश्चिम में तैनात उसके जासूसों का पूरा विवरण है.

हज़ारों पन्नों के इन दस्तावेज़ों में सोवियत संघ के लिए जासूसी करने वाले दो ब्रितानिययों का भी ज़िक्र है.

दस्तावेज़ों के मुताबिक डोनाल्ड डुअर्ट मैक्लीन और गाय बर्गेस नाम इन दो जासूसों को रूसी सरकार नशेड़ी और लापरवाह समझती थी.

इन दस्तावेज़ों को दस साल की कड़ी मेहनत से जमा किया गया जब वासिलि मित्रोखिन केजीबी की विदेशी खुफ़िया शाखा के मुख्यालय में तैनात थे.

संभालने का जतन

वे दफ्तर से फ़ाइलों को घर ले जाकर उनकी हाथ से नकल उतारते और फिर टाइप करते थे. इन्हें क्रमवार मिलाकर उन्होंने किताब की शक्ल दी. जिन्हें उन्होंने गांव में स्थित अपने घर में छुपाया था.

इनमें से कुछ को उन्होंने दही मथने वाले बर्तन में रखकर ज़मीन में गाड़ दिया था.

खुफ़िया इतिहासकार क्रिस्टोफ़र एंड्रूय के मुताबिक़ अमरीकी और ब्रिटिश अधिकारी इसे अबतक का सबसे महत्वपूर्ण ख़ुफ़िया स्रोत मानते हैं.

सोवियत संघ के 1991 में टूटने के बाद मित्रोखिन ने 1992 में एक बाल्टिक देश की यात्रा की थी. हालांकि वो कौन सा बाल्टिक देश था ये कभी सार्वजनिक नहीं हुआ. उन्होंने कुछ नमूने अमरीकी दूतावास को दिखाए थे. लेकिन उसने उन्हें लेने से इनकार कर दिया.

जासूसों की दुनिया

इसके बाद उन्होंने ब्रितानी दूतावास से संपर्क कर उसे ये जानकारियां सौंपी.

मित्रोखिन ने अपना बाकी का जीवन ब्रिटेन में ही गुज़ारा, जहाँ 2004 में 81 साल की उम्र में उनकी मौत हुई.

इन जानकारियों पर आधारित एंड्रूय की किताब 1997 में आई. इसके बाद दुनिया ने मित्रोखिन के बारे में जाना.

इनसे ही पता चला कि 87 साल के केजीबी जासूस मेलिटा नारवुड ने ब्रिटेन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियां सोवियत संघ को दी थीं.

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