ग़ज़ा मसले के समाधान के लिए आगे आए ओबामा

  • 11 जुलाई 2014
ग़ज़ा पर इसराइली हवाई हमला Image copyright AFP

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि उनकी सरकार ग़ज़ा में तनाव और दुश्मनी भरा रवैया ख़त्म करने में दोनों पक्षों की मदद के लिए तैयार है.

फ़लस्तीनी संगठन हमास के रॉकेट हमलों के जवाब में इसराइली वायु सेना ने पूरी सीमा पर हमले किए हैं. जिनमें अस्सी से अधिक लोग कथित रूप से मारे गए हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से फ़ोन पर बात की है और ज़ोर देकर कहा है कि दोनों पक्षों को संयम बरतने की ज़रूरत है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई.

उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और आम लोगों को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.

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वहीं संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के राजदूत रियाज़ मंसूर ने कहा है कि ग़ज़ा में हालात बड़ी तेज़ी से बदतर होते जा रहे हैं.

उधर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ग़ज़ा पर हमले तेज़ करने की चेतावनी दी है.

रफ़ा सीमा

इससे पहले, पड़ोसी देश मिस्र के सरकारी टेलीविज़न पर सूचना जारी की गई है कि मिस्र की सरकार ने रफ़ा सीमा खोलने का फ़ैसला किया है ताकि इसराइली हमलों में घायल हुए लोगों को निकाला जा सके.

मिस्र का कहना है कि वो दोनों पक्षों के सम्पर्क में है.

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राजधानी क़ाहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मिस्र इससे पहले भी दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है लेकिन ऐसा लगता है कि मिस्र को इस बार संघर्ष विराम की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि संघर्ष विराम से हमास को फ़ायदा हो सकता है और मिस्र ऐसा कभी नहीं चाहेगा.

इसकी वजह ये है कि मिस्र हमास को मुस्लिम ब्रदरहुड से जोड़कर देखता है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड को काफ़ी हद तक ख़त्म करने की कोशिश की गई है. मिस्र हमास के साथ भी ऐसा ही चाहता है और ये बात इसराइल के पक्ष में भी जाती है.

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