अफ़ग़ानिस्तान: दुकानें फ़ीकी, बाज़ार खाली

  • 14 जुलाई 2014
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अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव से पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच ज़िंदगी ठहर सी गई है. रमज़ान के महीने में दुकानें फ़ीकी हैं और बाज़ार खाली.

राष्ट्रपति पद के दो उम्मीदवारों के एक दूसरे पर चुनाव में धांधली के आरोप लगा रहा हैं और अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.

आम लोगों को नहीं पता कि चुनावी नतीजे उनके भविष्य के लिए क्या लेकर आएंगे.

संशय की स्थिति

देश के पश्चिमी प्रांत हेरात के एक व्यापारी गुलाम साक़ी के मुताबिक स्थिति हताशाजनक है और वो खुद को असहाय महसूस करते हैं.

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उनकी कपड़ों की दुकान है. अपनी दुकान में निराश बैठे हुए वह कहते हैं, "बाज़ार पूरी तरह से खाली है. हम उम्मीद करते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र से लोग सामान खरीदने आएंगे लेकिन वे नहीं आ रहे हैं. "

अफ़ग़ानिस्तान में ज़्यादातर लोग गुलाम साक़ी की तरह ही महसूस करते हैं.

हेरात में प्रॉपर्टी के व्यवसाय में लगे खोजा अहमद ने बताया कि पिछले तीन महीने से उन्हें एक भी ग्राहक नहीं मिला है. आखिरकार मैं अब मजबूर हो चुका हूँ अपना व्यवसाय बंद करके कुछ और करने के लिए.

काबुल में भी लोगों की यही दास्तान है.

काबुल में मोबाइल फ़ोन की दुकान चला रहे अहमद शाह का कहना है," आप कहीं भी जाओ लोग चुनाव के बारे में बात करते नज़र आएंगे. हर कोई पूछता नज़र आएगा क्या हुआ और आगे क्या होगा. यह वाकई में हमारे जीवन और काम को प्रभावित कर रहा है."

रमज़ान में उम्मीद के सहारे

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ऐसे माहौल में अधिकांश लोग अपने व्यापार पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.

चुनाव और रमज़ान का महीना शुरू होने की वजह से चीज़ों की कीमतें भी बढ़ गई हैं.

कंधार प्रांत में मिठाई की दुकान चलाने वाले जमील अहमद कहते हैं कि रमज़ान के महीने में उनकी दुकान पर आमतौर पर भीड़ रहती थीं लेकिन इस साल उसके आधे ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में रमज़ान उम्मीदों और खुशियों का वक्त होता है, और इस बार लोग हालात बेहतर होने की उम्मीद कर रहे हैं.

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