पाकिस्तानी मीडिया में छाए सुब्रमण्यम स्वामी

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Image caption स्वामी के बयान अकसर विवादों में रहे हैं

बीते हफ़्ते भारत के उर्दू अख़बारों में जहां पाकिस्तानी चरमपंथी हाफ़िज़ सईद और भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक की मुलाक़ात छाई रही तो पाकिस्तान में सुब्रमण्यम स्वामी के बयान की ख़ासी चर्चा रही.

नवाए वक़्त ने भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी के इस बयान पर संपादकीय लिखा है कि पाकिस्तान को सैन्य रूप से हराने में भारत को सिर्फ़ दो साल लगेंगे.

अख़बार कहता है कि भारतीय जनता पार्टी के इरादे किसी से छिपे नहीं है, वो अखंड भारत पर यक़ीन रखती है.

अख़बार लिखता है कि मोदी सरकार पहले ही रक्षा बजट में वृद्धि कर साफ़ कर चुकी है कि उसे शांति से कोई मतलब नहीं है. पाक सरकार को आड़े हाथ लेते हुए नवाए वक़्त कहता है कि कल तक हम भारत से सीना तान कर बात करते थे और आज सौहार्द की बातें करते हैं.

कई और भी अख़बारों में इस बयान की चर्चा है.

ब्रिक्स बैंक से कितनी उम्मीदें

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जंग ने ब्रिक्स देशों की ओर से अपना बैंक बनाने के ऐलान पर संपादकीय लिखा है.

अख़बार कहता है कि इस बैंक में पाकिस्तान का दोस्त चीन अहम भागीदार है लेकिन उसके साथ भारत भी है, जिसका रवैया पाकिस्तान को लेकर जगज़ाहिर है. ऐसे में देखना होगा कि ये बैंक पाकिस्तान के लिए कितना फ़ायदेमंद होगा.

पाकिस्तान में पुलिस ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के घर पर हमले की कोशिश को नाकाम बनाने का दावा किया.

इस पर दैनिक ख़बरें ने लिखा है कि देश भर में सुरक्षा को बेहतर बनाना होगा क्योंकि उत्तरी वज़ीरिस्तान में जारी सैन्य अभियान से बचने के लिए बहुत से चरमपंथी सिंध और पंजाब में शरण लिए हुए हैं, इसलिए आने वाले दिनों में हमले बढ़ सकते हैं.

वहीं औसाफ़ ने पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की इस चिंता को अपने संपादकीय में जगह दी है कि अदालतों से चरमपंथियों को सज़ा न मिलने से सुरक्षा बलों की कोशिशों पर पानी फिर रहा है. अख़बार लिखता है कि पकड़े जाने वाले चरमपंथियों में सिर्फ़ छह फ़ीसदी को ही सज़ा मिलती है.

आजकल ने कम बारिश और महंगाई को एक कार्टून में पिरोया है, जिसमें एक मंत्री एक आम आदमी पर चप्पल तान कर कह रहे है- 'कोई बिजली नहीं मिलेगी, जाओ पहले बारिश के लिए दुआ करो.'

किसने कराई मुलाक़ात

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वहीं भारतीय अख़बारों में राष्ट्रीय सहारा ने पत्रकार वेद प्रताप वैदिक की पाकिस्तानी चरमपंथी हाफ़िज़ सईद से मुलाक़ात पर सवाल उठाए हैं.

अख़बार कहता है कि भारतीय उच्चायोग साफ़ कह चुका है कि इस मुलाक़ात में उसकी कोई भूमिका नहीं है तो क्या फिर ये मुलाक़ात पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ने कराई थी.

अख़बार कहता है कि इस मुलाक़ात को लेकर वैदिक जो बता रहे हैं, वो संतोषजनक नहीं है.

वहीं हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने यूक्रेन में मलेशियाई विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने पर लिखा है- इस पर पूरी दुनिया को विरोध करना चाहिए क्योंकि बेक़सूर लोगों की इस तरह हत्या को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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