ग़ज़ा में हर घंटे एक बच्चे की मौत

  • 23 जुलाई 2014
ग़ज़ा पर हमला Image copyright BBC World Service

ग़ज़ा पर इसराइल के हमलों में 24 घंटों के दौरान 26 बच्चों की मौत हो गई यानी हर घंटे एक बच्चे की मौत.

मानवीय मामलों का समन्वय करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन ओसीएचए की रिपोर्ट में 21 जुलाई की दोपहर तीन बजे से 22 जुलाई की दोपहर तीन बजे तक मारे गए बच्चों के आंकड़े दिए गए हैं.

ओसीएचए के मुताबिक़ इस दौरान कुल 120 फ़लस्तीनी लोग मारे गए. इनमें 26 बच्चे और 15 महिलाएं थीं.

संगठन के मुताबिक़ जुलाई के पहले हफ़्ते में ग़ज़ा में संघर्ष की शुरुआत होने के बाद से अब तक कुल 599 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.

नागरिकों की मौत

इनमें से 443 आम लोग हैं. मरने वाले आम नागरिकों में 147 बच्चे और 74 महिलाएं शामिल हैं. इस संघर्ष में 28 इसराइली भी मारे गए हैं, जिनमें दो आम नागरिक और 26 सैनिक शामिल हैं.

इस संघर्ष में 3504 फ़लस्तीनी घायल हुए हैं. इनमें 1,100 बच्चे और 1,153 महिलाएं शामिल हैं.

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इन आंकड़ों में उन मामलों को शामिल नहीं किया गया है, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई है. घायलों की संख्या फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है.

इसराइल की ओर से ज़मीनी कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से ग़ज़ा से एक लाख 20 हज़ार लोग पलायन कर चुके हैं. इसराइल ने ग़ज़ा में तीन किलोमीटर की एक पट्टी को 'बफ़र ज़ोन' घोषित किया है.

स्कूलों में शरण

इस संघर्ष की वजह से एक लाख 17 हज़ार फ़लस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से चलाए जा रहे 80 स्कूलों में शरण ली है.

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इसके अलावा कई हज़ार लोगों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे स्कूलों में भी शरण ली है.

ओसीएचए की रिपोर्ट बताती है कि 21 जुलाई को शाम चार बजे के क़रीब चार बजे दक्षिण ग़ज़ा के एक आवासीय परिसर पर इसराइली हवा हमले में अल क़ैसर परिवार के दस लोगों की मौत हो गई.

इनमें से छह बच्चे थे. इनकी उम्र तीन से 13 साल के बीच थी.

उसी दिन रात आठ बजे मध्य ग़ज़ा के एक घर पर हुए इसराइली हवाई हमले में 10 लोगों की मौत हो गई, इनमें तीन बच्चे थे.

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