अब लीबिया में फंसीं भारतीय नर्सें

  • 28 जुलाई 2014
भारतीय नर्स Image copyright BBC World Service

इराक़ के बाद अब लीबिया की अंदरुनी लड़ाई में भारतीय फंस गए हैं. यहां कम से कम 65 भारतीय नर्सें और अन्य कर्मचारी घर वापसी को लेकर चिंतित हैं.

नॉन रेसीडेंट केरल अफ़ेयर्स के सीईओ पी सुदीप ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''पिछले तीन दिनों में वापसी का इंतजार कर रहे लोगों के 120 फ़ोन कॉल मिले हैं. इनमें से 65 लोगों ने तुरंत वापसी की इच्छा जताई है.''

केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा, ''मैंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद के लिए अपील की है. मुख्य समस्या यह है कि त्रिपोली हवाईअड्डा बंद है. सबसे नज़दीक हवाईअड्डा 15 किमी दूर मिटिगा में है. हमने विशेष उड़ानों से उन्हें वापस लाने की अपील की है.''

लीबिया में फंसी इन नर्सों के हॉस्टल और अल ख़ादर अस्पताल के बीच लड़ाई चल रही है.

गद्दाफ़ी के सत्ता से बेदखल होने के साथ ही लीबिया में अंदरुनी संघर्ष शुरू हो गया था. पूरे देश में स्थानीय लड़ाके सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हैं.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में सरकारी सुरक्षा बलों और लड़ाकों में गोलीबारी हो रही है.

2011 में भी थे यही हालात

ओमान चांडी ने बताया कि त्रिपोली स्वास्थ्य केंद्र में ही 350 भारतीय नर्सें और अन्य कर्मचारी काम कर रहे हैं. बेनगाज़ी और त्रिपोली के बीच क़रीब 1500 भारतीय काम कर रहे हैं.

दिलचस्प बात ये है कि त्रिपोली में फंसे इन लोगों में वे लोग भी हैं जिन्हें साल 2011 में सुरक्षित निकाला गया था.

पी. सुदीप कहते हैं, ''वर्ष 2011 में भारत ने लीबिया न जाने की सलाह जारी की थी. मैंने एक महिला से पूछा क्यों वो वापस गईं तो उनका जवाब था कि वो पैसे कमाना चाहती थीं.''

पिछले महीने इराक़ के तिकरित में फंसी 46 नर्सों में से 32 भारत वापस आने के लिए अनिच्छुक थीं क्योंकि उन्हें शिक्षा और नौकरी की ख़ातिर लिए गए भारी ऋण को चुकाना था.

लेकिन उन्हें वापस आना पड़ा, क्योंकि आईएसआईएस के लड़ाके उन्हें मोसुल लेकर चले गए थे. आख़िरकार इरबिल से उन्हें भारत वापस लाया गया.

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