ईद पर तरसता पाकिस्तानी सिनेमा

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पाकिस्तान में हिंदी फिल्में ख़ूब लोकप्रिय हैं, इसीलिए बॉलीवुड की हर बड़ी फिल्म वहां भी रिलीज़ होती है.

इस बार सलमान ख़ान की फ़िल्म किक ईद पर वहां भी रिलीज़ हुई. लेकिन पाकिस्तानी सिनेमा पर नज़र डालें तो सिर्फ़ सूखा नजर आता है.

जहां कभी पाकिस्तान में साल भर में क़रीब डेढ़ सौ फ़िल्में रिलीज़ होती थीं, अब सिर्फ छह या सात ही सिनेमा हाल तक पहुंचती हैं.

इस बार ईद पर पाकिस्तान में सिर्फ एक बड़ी फिल्म रिलीज़ हुई फ़ैसल बुख़ारी निर्देशित सल्तनत. इस फ़िल्म कई भारतीय कलाकारों ने भी काम किया है.

'बॉलीवुड से मुक़ाबला नहीं'

फ़िल्म की हीरोइन श्वेता तिवारी हैं. उनके अलावा अचिंत कौर और गोविंद नामदेव जैसे भारतीय कलाकार भी इस फ़िल्म का हिस्सा हैं.

इमेज कॉपीरइट Sajid Nadiadwala

लेकिन सल्तनत को मुकाबला करना पड़ रहा है सलमान ख़ान की फ़िल्म 'किक' से.

फ़िल्म समीक्षक सैफ़ सपरा कहते हैं, "भारतीय फ़िल्में करोड़ों के बजट से बनती हैं. पाकिस्तानी फ़िल्मों से उनका कोई मुक़ाबला ही नहीं है. इसलिए किक का पलड़ा पाकिस्तानी फ़िल्मों के मुक़ाबले भारी ही रहेगा."

'फिल्मों का छोटा दायरा'

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पाकिस्तान में अब भी बहुत सी फिल्में पुरानी तकनीक से बनती हैं

पाकिस्तान के बड़े शहरों में हाल के वर्षों में कई नए सिनेमा घर बने हैं. लेकिन स्थानीय फ़िल्मों की कमी साफ देखा जा सकती है.

अशांति के शिकार बलूचिस्तान और ख़ैबर पख्तून ख्वाह में तो फ़िल्में चलती ही नहीं हैं. ऐसे में सिंध और पंजाब के ही कुछ शहरों में फ़िल्में दिखाई जाती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार