यूक्रेन: 'राक्षस' कमांडर से बचाया पति को

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यूक्रेन की सेना के कैप्टन रोमन ज़ासुखा, उत्तर-पूर्व में दोनेत्स्क शहर से 35 किलोमीटर दूर स्थित होरलिवका में ''डीमन'' या राक्षस उपनाम वाले विद्रोही सेना के कमांडर की क़ैद में एक महीने तक रहे.

उनकी पत्नी ओकसाना भी वहां पहुंच गईं और जुलाई के अंत में अपने पति की रिहाई तक उनके साथ रहीं.

यूजेनिया शिडलोविस्का की रिपोर्ट विस्तार से पढ़ें

रोमन इतिहास के शिक्षक हैं. यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण मिला था.

इस साल मार्च में वे स्वयंसेवी सैनिक के तौर पर यूक्रेन की सेना में शामिल हुए. थोड़े ही दिनों में उन्हें पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों के ख़िलाफ़ मोर्चे पर जाना पड़ा.

इसी दौरान विद्रोही सैनिकों ने उन्हें कैदी बना लिया.

पति के पास जाने का फ़ैसला

ओकसाना को अपने पति के क़ैदी बनाए जाने की ख़बर रूसी टीवी पर दिखाए गए वीडियो से मिली. उनके पति को पीटा गया था और उनसे पूछताछ हुई थी.

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ओकसाना जानती थीं कि उन्हें अपने पति को बचाने के लिए होरलिवका जाना ही होगा.

ओकसाना ने बीबीसी से बताया, "जब मैं डनिप्रोपेटरोवास्क क्षेत्र में पहुंची तो रोमन का फ़ोन आया. उसने बताया कि वो बंधक बना लिया गया है."

ओकसाना ने आगे कहा, "रोमन ने मुझे उधर आने से रोका, लेकिन मैंने उसे बताया कि मैं नज़दीक आ गई हूं और तुम्हारे बिना नहीं लौटूंगी."

बंधक बनाने वालों ने रोमन और उनके साथियों को विद्रोही कमांडर इगोर बेज़लर को सौंप दिया था. बेज़र का उपनाम ''बेस'' था जिसका मतलब होता है ''राक्षस''.

ओकसाना जब दोनेत्स्क क्षेत्र में पहुंची तो उन्होंने इगोर बेज़लर से संपर्क साधा.

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उन्होंने बीबीसी को बताया, "दूसरे दिन सुबह इगोर का ख़ुद मेरे पास फोन आया. उन्होंने मुझे भरोसा दिया कि अगर मैं वहां आती हूं तो मेरे साथ कुछ ग़लत नहीं होगा. फिर उसके साथी मुझे रेलवे स्टेशन पर लेने आए."

बंधक नहीं मेहमान

इन बंधकों को पुलिस की इमारत में रखा गया. उनके कमरे में एक कोने में एक मेज़ और एक गद्दा था.

ओकसाना ने बताया, "बेज़लर ने बार-बार ज़ोर देकर कहा कि मैं उसकी मेहमान हूं, न कि बंधक."

ओकसाना के मुताबिक़ दो बंधकों की मां भी वहां मौजूद थीं और ये सब लोग रसोई में काम करते थे.

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ओकसाना ने बताया, "मैं ख़रीददारी भी करती थी और फिर सीधे पति के पास आ जाती थी. मुझे कहा गया था कि मैं जब चाहूं वहां से जा सकती हूं, लेकिन मैं अपने पति के साथ अंत तक रही, जब वहां लड़ाई चल रही थी."

ओकसाना अपने पति के साथ तब घर लौटीं जब विद्रोही सैनिकों ने बंधकों को रिहा कर दिया.

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