'...तो मैं पुराना पाकिस्तान बेच दूं?'

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पाकिस्तान में पिछले दस दिनों से संसद के सामने दो-दो धरने चल रहे हैं. एक इमरान ख़ान का और दूसरा ताहिरुल क़ादरी का.

पाकिस्तान सरकार ने छह मांगें मान ली हैं लेकिन इमरान ख़ान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ के इस्तीफ़े पर अड़े हुए हैं. ख़ैर इस सबसे प्रदर्शनकारी बेहद परेशान हैं.

वज़ीरिस्तान में सैन्य अभियान के कारण क़रीब 10 लाख लोग बेघर हो गए हैं, लेकिन पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉानिक मीडिया में धरने के अलावा कोई ख़बर नहीं चल रही है.

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के संसद के सामने चौक पर दो धरने साथ साथ चल रहे हैं. इमरान का मुक्ति धरना है, जो नया पाकिस्तान बनाना चाहता है जबकि दूसरा मौलाना ताहिर उल क़ादरी का क्रांति धरना है जो पुराने पाकिस्तान में ही इंकलाब लाना चाहता है.

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उधर, फेसबुक पर किसी ज़ालिम ने पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की तस्वीर लगा दी है जिस पर लिखा है- अगर तुम लोग नया पाकिस्तान बना रहे हो तो फिर पुराना वाला मैं बेच दूं.

पिछले दस दिन और रात से ये हाल है कि टीवी चैनल्स देख देख कर आंखें सूज गई हैं. टीवी कैमरे जिन तीन टांगों पर खड़े हैं वो भी मारे थकान के टेढ़ी हुई जा रही हैं. कैमरे के लेंस भी इतने गरम हो चुके हैं कि उन्हें भी एक के चार चार नज़र आ रहे हैं.

जिन लाउडस्पीकरों पर इमरान ख़ान और आदरणीय ताहिर उल क़ादरी दो दो घंटे भाषण दे रहे हैं, वो भी भाषण ख़त्म होते होते थक थकाकर लटक जाते हैं.

पहले त्यागपत्र

एक लाउडस्पीकर ने तो तीन दिन पहले ही श्रीमान क़ादरी की धुआंधार क्रांति से डर कर इलेक्ट्रिक शॉर्टसर्किट से लटक कर आत्महत्या कर ली. टीवी देखने वाले करोड़ों दर्शकों को वे पांच गीत तो अब ज़बानी याद हो चुके हैं जो तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी इमरान ख़ान के भाषण के बीच बीच चलाती रहती है.

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धरने में बैठे हज़ारों बच्चे, महिलाएं और युवा कोई सुपरमैन नहीं हैं. ज़ाहिर है शारीरिक शक्ति और स्टैमिना की भी एक हद होती है. नहाने-धोने, खाने-पीने, दवा-दारू और साफ़ सफ़ाई की समस्याएं गंभीर हो चली हैं. लगभग सभी बड़े राजनीतिक दल इमरान ख़ान और नवाज शरीफ़ सरकार के बीच सुलह सफ़ाई में जुटे पड़े हैं.

सरकार चुनावों में गड़बड़ी की जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाने समेत छह में से पांच मांगों को पहले ही मान चुकी है और ये भी मान चुकी है कि अगर धांधली के आरोप साबित हो गए तो प्रधानमंत्री त्यागपत्र भी दे देंगे.

जबकि ख़ान साहब की ज़िद है कि पहले त्यागपत्र, फ़िर जांच आयोग. मतलब यह है कि देश पिछले दस दिनों से आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चक्काजाम से जूझ रहा है.

उत्तरी वज़ीरिस्तान में चल रहा फौजी ऑपरेशन और इसके कारण वहां से बेघर हुए 10 लाख शरणार्थियों का मसला हो या मोदी सरकार की ओर से विदेश सचिवों की बैठक रद्द करने का बड़ा समाचार. ऐसे विषयों के बारे में खोजने की इच्छा अगर किसी पाकिस्तानी को हो तो उसे विदेशी चैनल ही देखने पड़ेंगे.

नया पाकिस्तान

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देसी चैनलों पर तो सिर्फ धरना ही दिख रहा है, बिक रहा है. धरना न हुआ, बावले गांव में ऊंट आ गया.

आख़िर कब तक छिपाते. इमरान ख़ान ने दो दिन पहले कह ही डाला कि वो नया पाकिस्तान इसलिए तुरंत बनाना चाहते हैं ताकि फिर नई शादी कर सकें.

हालांकि पुराने पाकिस्तान में नई नई लड़कियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन ख़ान को कौन समझाए. यूं समझिए कि जिस तरह हर क़ामयाब मर्द के पीछे एक औरत होती है, उसी तरह हर धरने के पीछे एक औरत है.

मेरा तो ख़्याल है कि हमें सब कामकाज छोड़कर उस औरत को ढूंढना चाहिए क्योंकि शादी के बाद जब इमरान ख़ान का ये नया पाकिस्तान बनाएगी तो इमरान ख़ान के सब अगले पिछले धरे रह जाएंगे.

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