क्या इसराइल और हमास की लड़ाई ख़त्म हुई?

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इसराइल और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच ग़ज़ा पट्टी में एक लंबे समय के संघर्ष विराम पर सहमति हो गई है. लगभग सात हफ़्तों तक चले इस संघर्ष में 2200 लोग मारे गए. मिस्र ने ये संघर्ष विराम कराने में मदद की है.

संघर्ष विराम की घोषणा के बाद ग़ज़ा में जश्न के तौर पर हवा में गोलियाँ चलाई गई हैं. इसराइल ने आठ जुलाई को 'ऑपरेशन प्रोटेक्टिव एज' की शुरुआत की थी. इसका मक़सद इसराइल में रॉकेट हमले रोकना था. बाद में उसने चरमपंथियों की सुरंगें नष्ट करने का काम भी इसमें जोड़ दिया.

क्या लड़ाई ख़त्म हो गई है?

लगभग सात हफ़्तों के इस संघर्ष के दौरान कई बार कुछ समय के लिए संघर्ष विराम हुआ था मगर दीर्घकालिक संघर्ष विराम की बात अब हुई है.

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दोनों पक्षों ने मिस्र की बात मान ली है. मगर यहाँ तक पहुँचने में काफ़ी समय लगा.

इससे पहले जो भी संघर्ष विराम हुए वे कम समय में ही ख़त्म हो गए.

मगर यहाँ ये ध्यान रखना होगा कि इससे पहले के संघर्ष विराम जहाँ कुछ घंटों या दिनों के होते थे इस बार का संघर्ष विराम समयावधि की बात नहीं करता है.

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देखिए ग़ज़ा पट्टी में संघर्ष के बीच शादी की तस्वीरें

लगभग 50 दिन की लड़ाई के बाद दोनों ही पक्षों में संघर्ष विराम कराने की मंशा प्रबल थी. इतने दिनों के संघर्ष के बाद दोनों ही पक्ष किसी नतीजे पर पहुँचना चाहते थे क्योंकि जानोमाल का नुक़सान दोनों ओर हुआ है.

संघर्ष विराम में क्या बातें हैं?

इस संघर्ष विराम में वे कई बातें हैं जिन पर कुछ हफ़्तों से बातचीत जारी थी.

मगर यहाँ ध्यान रखना होगा कि दोनों ही पक्षों के शुरुआती बयानों में कुछ अंतर थे.

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फ़लस्तीनी गुट ग़ज़ा की घेरेबंदी में इसराइल की ओर से राहत की बात कह रहे हैं. इस दौरान मानवीय राहत सामग्री और भवन निर्माण सामग्री ग़ज़ा पहुँच सकेगी.

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उनका दावा है कि मछली मारने की सीमा भी बढ़ाई जाएगी.

इस बीच एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इसराइल ने जहाँ मिस्र का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है वहीं समुद्री टर्मिनल, हवाई अड्डे या इसराइल में बंद फ़लस्तीनी क़ैदियों के मसले पर कोई बात नहीं हुई है.

ये कहा गया है कि अधिक विवादास्पद मुद्दों पर मिस्र की राजधानी काहिरा में अगले महीने से बातचीत शुरू होगी. इसके तहत ग़ज़ा के चरमपंथी गुटों के हथियार डालने की इसराइली माँग पर भी बात होगी.

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