पहाड़ फ़तह किए, कारोबार में फूला दम

हसन सदपारा

पाकिस्तान के सबसे कामयाब पर्वतारोहियों में एक हसन सदपारा ने एवरेस्ट और 8000 मीटर से अधिक की दुनिया की सभी पांच चोटियों पर फ़तह हासिल की है.

पहाड़ों पर आसानी से चढ़ने का हुनर बखूबी जानने वाले हसन ने 'पर्वतारोहण पर्यटन' को ही जीवनयापन बनाने का फ़ैसला किया.

मगर जब बारी कारोबार को ऊंचाइयों पर ले जाने की आई, तो वह नाकाम रहे.

कारोबार न चलने से उनकी वर्षों की कमाई तो डूब गई, पर उन्हें इस नाक़ामी से सबक़ भी मिला.

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हसन के विज़िटिंग कार्ड पर भी लिखा है 'सपनों को हक़ीक़त में बदलो.'

उन्होंने कुछ साल पहले एक टूर कंपनी शुरू की. वे पर्वतारोहण के उपकरण नेपाल और चीन से आयात करते हैं, पर दुकान से उनकी आमदनी इतनी भर है कि उन्हें जीवनयापन के लिए कर्ज़ नहीं लेना पड़ता.

हसन कहते हैं, "मेरे पास क़रीब 10 हज़ार डॉलर का सामान है, मगर कोई ख़रीदार नहीं है."

लेकिन हमेशा से ही ऐसा नहीं था.

जब उन्होंने 1999 में पहली बार यह दुकान खोली थी, तो उत्तरी पाकिस्तान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था.

साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले दुनियाभर के पर्यटक बाल्तिस्तान आते थे. बाल्तिस्तान में ही दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के-2 है.

बाल्तिस्तान सीमा भारत प्रशासित कश्मीर और चीन के झिनज़ियांग प्रांत से सटी है.

हसन पुराने दिन याद करते हुए कहते हैं कि जब उनका पर्वतारोहण का करियर ढलान पर था तब विदेशी पर्यटकों के दम पर उनका कारोबार खूब चल रहा था.

9/11 का असर

अमरीका पर चरमपंथी हमले के बाद से पश्चिमी देशों के सैलानी जैसे ग़ायब हो गए. हसन कहते हैं, "सैलानी न होने का मतलब कारोबार नहीं."

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था चौपट हो गई. पर्यटकों पर आश्रित कुली, रसोइए, गाइड, ड्राइवरों को जीवनयापन करना मुश्किल हो गया.

वह कहते हैं, "यहां रोज़गार के लिए कोई कारखाना नहीं है, लेकिन यह जगह खूबसूरत क़ुदरती नज़ारों से भरपूर है."

हसन ने पर्वतारोहण से कमाई रक़म एक दोस्त के साथ कारोबार में लगा दी और कारोबार चलाने का जिम्मा साझीदार को दे दिया.

अशिक्षा बनी बाधा

मगर साझीदार ने अपना अलग कारोबार शुरू कर दिया. नतीजतन पर्यटन और पर्वतारोहण उपकरणों का यह कारोबार दम तोड़ गया.

हसन कहते हैं, "मैं दुनिया की सबसे मुश्किल पहाड़ियों पर चढ़ा हूं, मगर मैंने कभी पढ़ना-लिखना नहीं सीखा. यह मेरी सबसे बड़ी बाधा रही."

हसन अपने टूर कारोबार को नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं. यह पहले से कैसे अलग होगा.

वह कहते हैं, "पहली बात, इस बार मैं कोई साझीदार नहीं रखूंगा." इस बार वह अपने बेटे के साथ काम शुरू करेंगे.

उनका बेटा आरिफ़ अभी इस्लामाबाद में एमबीए कर रहा है और पिता के प्रोजेक्ट को लेकर रोमांचित है.

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