जिनके आगे सिर झुकाते हैं राष्ट्रपति

डिएगो एमब्रैज़ियो

इनके सामने कई देशों के राष्ट्रपति, राजदूत और सुप्रीम कोर्ट के जज सिर झुका चुके हैं. वो पोप से गले मिल चुके हैं.

इटली की सरकार ने उन्हें नाइटहुड दिया है और वॉशिंगटन शहर के सबसे जानदार इलाक़े डुपॉन्ट सर्किल के पास एक सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखा गया है.

इस हफ़्ते मैं भी पहुंचा उनके सामने सिर झुकाने. इनका नाम है डिएगो एमब्रैज़ियो और पेशे से नाई हैं-इतालवी नाई.

कैंचियों की चक-चक, मशीनों की घर्र-घर्र, इंतज़ार करते ग्राहक, सबकुछ किसी और हेयरकटिंग सैलून की तरह ही है. लेकिन दीवारों पर नज़र डालते ही आप चौंक जाते हैं.

पढ़िए विस्तार से ब्रजेश उपाध्याय की डायरी

जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा, नैंसी पेलॉसी, जॉन मेजर, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत महमूद अली दुर्रानी—पूरी दुकान में दुनिया के नामीगिरामी लोगों की तस्वीरें. और तस्वीरों पर डिएगो के लिए एक छोटा सा संदेश भी.

मेरी धड़कनें बढ़ गईं. कोसने लगा ऑफ़िस के उस सहयोगी को जिसने कहा था बाल कटवाने जा रहे हो तो डिएगो में जाना, वो अपने आप में एक अनूठा अनुभव है.

सोच रहा था अनुभव तो बढ़िया है, लेकिन अगर ये नामचीन लोग यहां बाल कटवाते हैं तो फिर मेरी जेब की तो बैंड बजने वाली है.

लेकिन दीवार पर लगी क़ीमत देखी तो रेट वही जो वॉशिंगटन में सबसे सस्ते सैलून का होता है यानी बीस डॉलर और जान में जान आई.

'नाम तो नहीं बताऊंगा'

मैंने पूछा क्या सचमुच इतने बड़े-बड़े लोग आपके पास बाल कटवाने आते हैं.

उनका जवाब था, “अब तक 26 राष्ट्रपति, 136 राजदूत, सुप्रीम कोर्ट के जज, कांग्रेस के सिनेटर और आप जैसे अनगिनत लोगों के बाल काट चुका हूं.”

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मुझे फिर भी यक़ीन नहीं हो रहा था. पूछा कि क्या बुश, ओबामा, क्लिंटन इस बीस डॉलर के सैलून में बाल कटवाने आ चुके हैं?

ज़ोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, “नाम तो नहीं बताऊंगा लेकिन 1980 के बाद से मैंने रेट कभी नहीं बढ़ाया यानी वही 20 डॉलर.”

बहुत ज़िद करने पर भी किसी राष्ट्रपति का नाम उन्होंने नहीं लिया लेकिन ये ज़रूर कहा कि वो किसी के घर नहीं गए, सभी उन्हीं की दुकान पर आए बाल कटवाने.

लोग आए हैं मुझे ढूंढते हुए

कहते हैं, “दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां आए हैं डिएगो को ढूंढते हुए और मैंने सबको वैसे ही गले लगाया है.”

उन्हें देखकर लगता है जैसे ये इंसान हमेशा किसी के इश्क़ में डूबा रहता है. होठों पर कोई इतालवी धुन, कपड़ों में नफ़ीसी, हर बात पर ज़ोर से हंसना, महिलाओं से फ़्लर्ट करना—ज़िंदगी से मानो कोई शिकायत नहीं.

उम्र साठ के ऊपर होगी लेकिन पूछने पर कहते हैं—“बस पच्चीस का हुआ हूं.”

कहते हैं कि अगर आप अपने काम से इश्क़ करते हैं तो कभी बूढ़े नहीं होते.

दुनिया भर के नाइयों की तरह ही उनकी भी सबसे पसंदीदा बहस का विषय पॉलिटिक्स ही है.

'क्योंकि मैं अच्छा हूं'

तो वॉशिंगटन की राजनीति में वो किस तरफ़ खड़े रहते हैं- डेमोक्रैट हैं या रिपब्लिकन?

हंसते हुए कहते हैं, “इसका जवाब नहीं दूंगा. जो मेरी कुर्सी पर बैठता है मैं उसी की तरफ़ होता हूं.”

बिज़नेस चलाने के लिए ये काफ़ी कारगर पॉलिसी है.

उनकी दुकान के सामने की सड़क का नाम चार साल पहले डिएगो एमब्रैज़ियो वे रखा गया. क्यों?

जवाब था, “क्योंकि मैं अच्छा हूं.”

गुडबाय ब्युटीफ़ुल

ज़िंदगी से कोई शिकायत? बिल्कुल नहीं. कोई ऐसी शख़्सियत जिसके बाल काटने की तमन्ना रह गई हो?

मुस्करा कर कहते हैं, “सोफ़िया लॉरेन.” बिल चुका कर निकलता हूं तो दरवाज़े तक आते हैं और वही कहते हैं जो वो हर ग्राहक से कहते हैं, चाव बेला—यानी गुडबाय ब्यूटीफ़ुल.

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