इबोला से जंग: तीन दिन का राष्ट्रीय बंद

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इबोला वायरस को फैलने से रोकने के लिए सियेरा लियोन ने तीन दिन के राष्ट्रीय बंद की घोषणा की है.

पश्चिम अफ़्रीकी देश के इस कदम पर स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली ग़ैर सरकारी संस्था मेडिसिन साँ फ़्रॉन्टियेर्स, एमएसएफ़, ने चिंता जताई है.

एमएसएफ़ का कहना है कि उसके अनुभव के मुताबिक इबोला पर काबू करने में बंद से मदद नहीं मिलती.

उलटा ऐेसे कदम से लोग अंडरग्राउंड हो जाते हैं या छुप जाते हैं जिससे बीमारी के संभावित मामले सामने नहीं आ पाते और बीमारी और ज़्यादा फैल जाती है.

सियेरा लियोन के व्यापार जगत ने भी राष्ट्रीय लॉकडाउन के फ़ैसले की ये कहते हुए निंदा की है कि इससे लोगों की रोज़ी-रोटी तीन दिन के लिए बंद हो जाएगी.

तीन दिन का ये कर्फ्यू इस महीने की 19 तारीख से चालू होगा और इसे लागू करने के लिए बीस हज़ार से ज़्यादा लोग तैनात किए जाएंगे.

''हार रहे हैं लड़ाई''

इससे पहले एमएसएफ़ के मुखिया ने संयुक्त राष्ट्र को बताया था कि पश्चिम अफ़्रीका में इबोला के ख़िलाफ़ लड़ाई हारी जा रही है.

योआन ल्यू ने कहा कि विश्व के बड़े नेता इतिहास के सबसे भीषण इबोला संक्रमण को रोकने में नाकाम हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इबोला राहत केंद्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या इतनी कम है कि कुछ केंद्रों में तो मरीज़ मरने के लिए ही पहुँच रहे हैं.

इबोला वॉयरस संकट के लिए संयुक्त राष्ट्र के समन्वयक डेविड नेबारो का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र हर मुमकिन कोशिश कर रहा है.

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उन्होंने कहा कि जितने बाहरी स्वास्थ्य कर्मियों का ला पाना संभव है हम उतने कर्मियों को ला रहे हैं.

पश्चिमी अफ़्रीका में फैले इबोला संक्रमण से अब तक 2,000 से ज़्यादा लोग मर चुके हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ हफ़्तों में हज़ारों और लोगों को इबोला संक्रमण हो सकता है.

इबोला की अभी तक कोई दवाई नहीं है. प्रायोगात्मक दवाई बंदरों पर कामयाब रही है.

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