ओबामा कहीं चेनी का पाठ तो नहीं पढ़ रहे!

इमेज कॉपीरइट AFP

इराक़ और सीरिया को लेकर अमरीका ने फ़ौजी कार्रवाई के संकेत दिए हैं. ओबामा ने कहा है कि चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट अमरीका के लिए ख़तरा है और वह उसे पूरी तरह नष्ट करने के लिए कार्रवाई करेंगे. इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी लिया जाएगा.

इराक़ की चर्चा के साथ ही वॉशिंगटन में एक बार फिर युद्ध के सुर गूंजने लगे हैं और राजनीतिक गलियारों में पूर्व उप राष्ट्रपति डिक चेनी दिखाई देने लगे हैं.

पढ़ें वॉशिंगटन डायरी विस्तार से

रामगोपाल वर्मा अगर अपनी डरने-डराने वाली पिक्चर को हिट करवाना चाहते हों तो मेरी तरफ़ से एक मुफ़्त सलाह है. अमरीका का टिकट कटवा लें और एक इंसान के चरणों में लेटकर गुहार लगाएं—गुरुदेव मुझे अपना शागिर्द बना लो.

इनका नाम है डिक चेनी. याद है न आपको ये नाम?

जी हां, जॉर्ज बुश के वही चहेते उप-राष्ट्रपति जिनके चेहरे पर हमेशा महाभारत के शकुनि मामा वाली कुटिल मुस्कान होती थी. जिन्होंने आप सबको यक़ीन दिलाया था कि सद्दाम हुसैन ने ऐसे हथियार छिपा रखे हैं, जो दुनिया का बेड़ा गर्क कर देंगे.

और इन दिनों जब इराक़ फिर से चर्चा में है तो डिक चेनी वॉशिंगटन में वैसे ही नज़र आने लगे हैं जैसे बरसात के दिनों में मेंढक.

फ़र्क बस एक है कि मेंढक टर्र-टर्र का सुर अलापता है, चेनी कैमरा और माइक देखते ही वॉर-वॉर यानी जंग की रट लगाने लगते हैं.

एक आदमी, एक मोहल्ला, एक राज्य नहीं- पूरे देश को डराना एक बहुत बड़ा हुनर है और चेनी को तो उसमें जैसे महारत हासिल है.

चेनी उवाच

इमेज कॉपीरइट AFP

चेनी को किसी मंच पर सुनिए. लगेगा जैसे 12 सितबंर की सुबह हो यानी 13 साल पहले 11 सितंबर को अमरीका पर हमले के बाद की सुबह जब पूरा देश सही मायने में सहमा हुआ था.

उनकी मानें तो अमरीका पर इतने ख़तरे मंडरा रहे हैं कि उसे दुनिया के हर कोने में फ़ौज भेजकर जंग शुरू कर देनी चाहिए.

रिपब्लिकन पार्टी के पुराने दिग्गजों और नौनिहालों की भी हालत ये है कि जब देखो तब ओबामा की शिकायत के लिए चेनी को वॉशिंगटन बुला लेते हैं.

चेनी भी तजुर्बेकार मुखिया की तरह शुरू हो जाते हैं कि अगर ओबामा ने इराक़ से फ़ौज बुलाने में जल्दबाज़ी न की होती, अगर पिछले साल ही सीरिया पर धावा बोल देते तो आज दुनिया की यह हालत न होती.

पूरी पार्टी दम साधकर इस प्रवचन को ऐसे सुनती है जैसे बाबा रामदेव अपने भक्तों से सांस खींचो कहने के बाद सांस छोड़ो कहना भूल गए हों.

और जैसे जंगल में एक सियार बोला “हुआ” तो सारे सियार पीछे-पीछे अलापते हैं “हुआ”, कुछ वैसे ही पूरी पार्टी जुट जाती है अमरीका को डराने की कवायद में.

रेटिंग डाउन

इमेज कॉपीरइट Getty

इस हफ़्ते जब ओबामा का भाषण सुना, तो एक बार तो मुझे ऐसा लगा जैसे वह भी चेनी के हुनर के शिकार बन गए हैं. जिन अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल किया उन्होंने, सुनकर बुश के दिनों की याद ताज़ा हो गई.

बड़े ज़माने के बाद रिपब्लिकंस के मुंह से भी उनके लिए वाहवाही सुनाई दी.

ओबामा जी की रेटिंग इन दिनों लुटी-पिटी हुई है. हो सकता है इस भाषण के बाद शायद थोड़ी बेहतर हुई हो.

रेटिंग में चल रही मंदी से ओबामा कितने परेशान हैं उसका अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि हाल ही में न्यूयॉर्क गए थे एक शादी में शामिल होने. दो-तीन घंटे खाली थे तो सोचा गॉल्फ़ खेल लें.

ख़बर है कि उनके मुलाज़िमों ने तीन गॉल्फ़ क्लबों से संपर्क किया पर किसी ने उन्हें खेलने की इजाज़त नहीं दी. सबने कहा ओबामा की सिक्योरिटी की वजह से उनके मेंबरों को परेशानी होगी.

क्या दिन आ गए हैं? शुरूआती दिनों में जब ओबामा के सितारे बुलंदी पर थे, तो यही क्लब बिछे जा रहे थे कि ओबामा के चरणों की धूल मिले, मेंबरों की ऐसी-तैसी होती है, तो होती रहे.

तुलना

इमेज कॉपीरइट Getty

लेकिन ओबामा जी से मैं तो फिर भी यही कहूंगा कि रेटिंग के चक्कर में न पड़ें. चेनी की बातों पर चलकर बुश का क्या हुआ, यह दुनिया देख रही है.

वॉशिंगटन के एक सरकारी स्कूल में छठी क्लास के बच्चों को होमवर्क दिया गया कि बुश और हिटलर में क्या-क्या समानताएं हैं उन्हें एक वेन डायग्राम के ज़रिए दिखाएं. यह ख़बर पढ़कर बुश पर क्या गुज़री होगी, आप सोच सकते हैं.

दुनिया को साथ लाने की कोशिशों के लिए ओबामा जी को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है. बस और दो साल की बात है, थोड़े-बहुत ड्रोन हमले, थोड़ी-बहुत भाषणबाज़ी के साथ निकाल लें, फिर ज़िंदगी भर चांदी ही चांदी.

गड़बड़ की तो छठी क्लास के बच्चों के होमवर्क में शामिल हो जाएंगे!

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार