व्लादिमीर पुतिन के रूस में 'ग़द्दार'

आंद्रे लुगुवोई

मॉस्को के एक रेस्त्रां में आंद्रे लुगोवोई अपने प्रिय विषय पर बात करते हैं और वो है ग़द्दार.

आंद्रे कोई आम व्यक्ति नहीं है. वो टीवी पर एक ख़ास सिरीज़ लेकर आ रहे हैं जिसे 'ग़द्दार' कहा जा रहा है. इसमें सोवियत संघ के ऐसे लोगों के बारे में बात होगी जिन्होंने अपने देश से धोखा किया.

आंद्रे लुगोवोई की एक और पहचान है. और वो ये कि ब्रिटेन की पुलिस को उनकी तलाश है.

आंद्रे रूस के पूर्व एजेंट एलेक्सांद्र लित्विनिएंको की हत्या के मामले में मुख्य संदिग्ध हैं.

लित्विनिएंको को ज़हर दिया गया था और 2006 में लंदन के एक अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा था.

मॉस्को से बीबीसी संवाददाता स्टीवन रोज़ेनबर्ग की रिपोर्ट

अपनी टीवी सीरिज़ के बारे में आंद्रे कहते हैं, "ये एक कार्यक्रम है. कोई राजनीति या दुष्प्रचार नहीं है."

लेकिन वो लंदन के सुशी बार में लित्विनिएंको को ज़हर देने के आरोप से इनकार करते हैं. लेकिन ये जरूर कहते हैं कि वो 'ग़द्दार' थे.

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Image caption लित्विनिएंको को नवंबर 2006 में रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 ज़हर दिया गया था

वो कहते हैं, "लित्विनिएंको की पत्नी ने ही बयान दिए हैं कि वो ब्रितानी ख़ुफिया सेवा के लिए काम कर रहे थे."

उनकी टीवी कार्यक्रम में अतीत के गद्दारों की बात होगी.

वो कहते हैं, "ग़द्दारी सिर्फ़ रूस की समस्या नहीं है. ये अमरीका और ब्रिटेन की भी समस्या है. कई ग़द्दार रूस और सोवियत संघ के लिए भी काम करते रहे हैं. जब तक टकराव रहेगा, तब तक ग़द्दार भी रहेंगे."

पुतिन की चेतावनी

कुछ ऐसी ही राय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी है.

पिछले महीने एक लाइव टीवी कार्यक्रम में उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग राष्ट्रीय हितों से ग़द्दारी करने को तैयार बैठे.

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रूस के सरकारी मीडिया में भी ऐसे लोगों पांचवा स्तंभ कह राष्ट्रीय हितों के लिए ख़तरा बताया जाता है.

सरकारी एटीवी ने हाल में एक दो क़िस्तों वाली डॉक्यूमेंट्री पेश की जिसमें ऐसे रूसी राजनेताओं, पॉप स्टारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आड़े हाथ लिया गया जो यूक्रेन की सरकार का समर्थन कर रहे हैं. इन लोगों को भी ग़द्दार का नाम दिया गया.

'बलि के बकरे'

मॉस्को में इतिहास पढ़ाने वाली तमारा इडलमन कहती हैं, "ये वैसा ही है जैसा स्टालिन के रूस और हिटलर के जर्मनी में होता था. ये दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर आप बलि के बकरे तलाशने लगेंगे तो आपको असल उत्तर नहीं मिलेंगे. आप इस संकट के असल उत्तर नहीं तलाश रहे हैं."

इडलमन भी यूक्रेन में रूसी हस्तक्षेप का विरोध करती है. एटीवी पर प्रसारित डॉक्यूमेंटरी में उन्हें भी गद्दार करार दिया गया था.

वो मानती हैं कि पुतिन का रूस स्टालिन का रूस नहीं है जहां तथाकथित जनता के दुश्मनों को गुलाग यानी फायरिंग दस्ते के पास भेज दिया जाता था.

फिर भी रूस में बलि के बकरों की तलाश अतीत की याद दिलाती है.

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