विरोध प्रदर्शनों के बीच जलवायु परिवर्तन सम्मेलन

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जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन से पहले बड़ी संख्या में लोगों ने संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किए हैं.

लोगों की मांग है कि जलवायु परिवर्तन के लिए राजनीतिक कार्रवाई की जाए जो नहीं हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र महा सचिव बान की मून भी इस मुद्दे पर विशेष दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

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Image caption न्यूयॉर्क में प्रदर्शन

लेकिन जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर विश्व के दो अहम देश भारत और चीन के शीर्ष नेताओं के इस सम्मेलन में भाग न लेने के कारण कुछ सवाल भी उठाए जा रहे हैं.

भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और चीन के उपप्रधानमंत्री ज़ांग गावली सम्मेलन में शिरकत करेंगे.

इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भाग नहीं ले रहे हैं.

इस पर्यावरण सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों सरकारी, गैर-सरकारी, बिज़नेस क्षेत्र के साथ साथ सिविल सोसाईटी के लोग भी शामिल हैं.

इस बीच तेल उद्योग में अकूत संपदा कमाने वाले अमरीका के रॉकफेलर परिवार का कहना है कि उनकी करोड़ों डॉलर की कल्याणकारी संस्था अब स्वच्छ ऊर्जा में ध्यान देने की योजना बना रही है.

रॉकफेलर ब्रदर्स फंड न्यूयॉर्क में इस बाबत घोषणा करेंगे कि अगले कुछ वर्षों में कैसे वो जैविक ईंधन में लगा अपना निवेश निकाल कर स्वच्छ ऊर्जा में लगाएंगे.

दुनिया में कई जानी मानी संस्थाओं ने मिलकर वैश्विस स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के लिए गठबंधन किया है जिसमें से रॉकफेलर ब्रदर्स फंड भी है.

इस वैश्विक गठबंधन से जुड़ी संस्थाएं जैविक इंधन में लगे अपने करीब पचास अरब डॉलर निवेश को निकाल कर स्वस्छ ऊर्जा में लगाने वाली हैं.

रॉकफेलर ब्रदर्स फंड की ये घोषणा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है.

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