क्यों इतने प्रतिभाशाली हैं चीनी छात्र?

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चीनी परिवार के बच्चे अक्सर पश्चिमी देशों के स्कूलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देखे गए हैं.

ब्रिटेन में किसी भी दूसरे नस्लीय समूह से चीनी बच्चों के परीक्षा परिणाम अच्छे होते हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजुकेशन ने एक अध्ययन में यह जानने की कोशिश की कि क्यों ये चीनी बच्चे दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं.

इसके तहत ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों का अध्ययन किया गया जहां चीनी परिवार के 15 साल के बच्चे अपने आस्ट्रेलियाई सहपाठियों से दो साल आगे थे.

उम्दा प्रदर्शन

यह अध्ययन इसके लिए कड़ी मेहनत और अभिभावकों की प्रतिबद्धता की ओर इशारा करता है.

चीनी और अन्य दूसरे पूर्वी एशियाई देशों के बच्चों का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के तुलनात्मक अध्ययन की विशेषता बन चुकी है.

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ये बच्चे पीसा टेस्ट रैंकिंग में अपना दबदबा कायम किए हुए हैं.

लेकिन अगर बच्चों का ये प्रदर्शन एशियाई स्कूल पद्धति की सफलता है तो फिर इससे इस बात का जवाब नहीं मिलता है कि दूसरे देशों में गए दूसरी पीढ़ी के चीनी छात्र पढ़ाई में क्यों अच्छे होते हैं?

पीसा टेस्ट में जगह बनाए आस्ट्रेलिया के चीनी छात्रों को अगर अलग देश के प्रतिनिधि के रूप में गिना जाए तो ये दुनिया भर के छात्रों के उम्दा प्रदर्शनों में एक होगा.

उनका प्रदर्शन सिर्फ शंघाई के छात्रों से ही कम है.

बड़ा कारण

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अध्ययनकर्ता पारिवारिक पृष्ठभूमि और अभिभावकों के पढ़ाई के मामले में हस्तक्षेप को इसका बड़ा कारण मानते हैं.

एक बड़ा कारण यह भी है कि चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के लोग अपने बच्चों का दाखिला अच्छे स्कूल में करवाने में कामयाब होते हैं.

ये छात्रों को परीक्षा में अपना प्रदर्शन सुधारने में बड़ी मदद करता है.

पूर्वी एशियाई परिवारों के अभिभावक शिक्षा के मामले में औसत ऑस्ट्रेलियाई अभिभावकों से बेहतर होते हैं.

इन देशों के बच्चे घर में भी हर हफ़्ते पढ़ाई पर आस्ट्रेलियाई छात्रों की तुलना में अतिरिक्त छह घंटे देते हैं.

इनमें से 94 फ़ीसदी छात्र यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना चाहते हैं.

ये आंकड़ा आस्ट्रेलियाई औसत से ज्यादा है.

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