आवाज़ उठाएं अफ़ग़ान औरतें: रूला ग़नी

रूला ग़नी

अफ़ग़ानिस्तान के नए राष्ट्रपति की पत्नी कुछ ख़़ास हैं. रूला ग़नी उन पंरपराओं को तोड़ती नज़र आ रही हैं, जिनमें नेताओं की पत्नियां लोगों की नज़रों से दूर रहती हैं.

राष्ट्रपति महल में जाने के बाद बीबीसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वो महिलाओं की इज़्ज़त बढ़ाने को प्रोत्साहन देंगी.

राष्ट्रपति चुनाव में अपने पति का चुनाव प्रचार करने वाली वो अकेली महिला थीं.

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Image caption रूला ग़नी की अशरफ़ गनी से मुलाक़ात 1970 में बेरूत के अमरीकन विश्वविद्यालय में हुई थी.

उद्घाटन भाषण में राष्ट्रपति ने अपनी पत्नी के योगदान का जिक्र किया तो, उस पर देशभर में चर्चा होने लगी.

रूला ग़नी अफ़ग़ानिस्तान के रूढ़िवादी समाज की संवेदनशीलता को अच्छी तरह जानती हैं. वो कहती हैं कि उनका विचार अफ़ग़ानिस्तान के जीवन के परंपरागत मूल्यों के ख़िलाफ़ नहीं है.

वो कहती हैं, "मैं मौज़ूदा सामाजिक संरचना को नहीं बदलना चाहती. पश्चिम में रहने के दौरान अपने आसपास परिवार न होने का नुक़सान मुझे उठाना पड़ा. मुझे लगता है कि 25 साल के गृह युद्ध के बाद भी अफ़ग़ानिस्तान में सामाजिक ताना-बाना बना हुआ है. यह एक बड़ी बात है."

रूला अफ़ग़ानिस्तान में पली बढ़ी नहीं हैं. उनका पालन-पोषण लेबनान के मैरोनाइट क्रिश्चियन परिवार में हुआ है. अशरफ़ ग़नी से उनकी मुलाक़ात 1970 में बेरूत के अमरीकन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हुई.

अशरफ़ ग़नी से शादी को लेकर रूला के माता-पिता परेशान थे. लेकिन उनके पिता ने अशरफ़ के परिवार से मिलने के लिए अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा की.

परंपरागत व्यक्ति

अशरफ़ के बारे में वो कहती हैं,'' वो एक बहुत ही परंपरागत व्यक्ति हैं. मैं चाहती हूं कि हर अफ़ग़ान पुरुष मेरे पति या पिता की तरह हो.''

यह दपंति 1970 के दशक में अमरीका चला गया, जहाँ अशरफ़ ने अपनी पीचएडी पूरी कर विश्व बैंक की नौकरी कर ली और रूला ने अपने दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया.

उनकी बेटी एक वीडियो कलाकार हैं और बेटा विकास के मुद्दों पर काम करता है.

वो कहती हैं कि राष्ट्रपति भवन में वो पहले तीन महीने केवल सुनेंगी और यह पता लगाएंगी कि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए क्या ज़रूरी है.

वो कहती हैं कि महिलाओं को अपनी बात कहने का साहस होना चाहिए. उनमें यह बताने का साहस होना चाहिए कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं.

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