अफ़ग़ानिस्तान: आख़िरी ब्रिटिश बटालियन लौटी

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अफ़ग़ानिस्तान में अपना अभियान ख़त्म करते हुए ब्रिटेन ने आख़िरी सैन्य ठिकाने को अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के हवाले कर दिया है.

कैप बाश्चियन पर लहरा रहा ब्रितानी झंडा नीचे कर दिया गया है. साथ ही, अहम सैन्य ठिकाना कैंप लेदरनेक, जो एक अमरीकी सैन्य संचालन केंद्र है, भी अफ़ग़ान सेना के सुपुर्द कर दिया गया.

साल 2001 में ब्रितानी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी.

तब से अब तक चले ब्रितानी सैन्य अभियान के दौरान 453 सैनिक मारे गए, जबकि अमरीका के 2349 अधिकारियों को जान गंवानी पड़ी.

वापसी अप्रैल से जारी

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साल 2006 के बाद से हेलमंद प्रांत स्थित कैंप बाश्चियन अफ़ग़ानिस्तान में ब्रितानी टुकड़ियों का प्रमुख ठिकाना था.

अभियान ख़त्म करने की शुरुआत ब्रिटेन ने अप्रैल महीने में की थी. तब हेलमंद के ब्रितानी कमांडर को अप्रैल में अमरीकी फ़ौज में स्थानांतरित कर दिया गया.

इसके अलावा ब्रितानी अधिकारियों, सैन्य वाहनों और सामानों का वापस लौटना कई महीनों से जारी है.

2009 में गंभीर संघर्ष के दौरान कैंप बाश्चियन में क़रीब 10,000 ब्रितानी सैनिक भेजे गए जबकि ब्रिटेन के 137 पेट्रोल ठिकाने दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में स्थापित किए गए.

झंडा झुका

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Image caption अफगानिस्तान में ब्रिटेन सैन्य अभियान में एक लाख 40 हजार ब्रितानी सैनिक शामिल हुए.

काबुल की ब्रितानी सैन्य अकादमी में अब कुछ गिने-चुने अधिकारी ही हैं. उनकी वापसी अगले साल होगी.

बाश्चियन में अभी ब्रिटेन के 300 सैनिक हैं.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सैन्य अभियान में एक लाख 40 हज़ार ब्रितानी सैनिक शामिल हुए.

इस दौरान 2009 में 108 सैनिक मारे गए थे. यह साल संघर्ष का सबसे बुरा साल रहा.

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