बांग्लादेश: इस्लामी नेता को मौत की सज़ा

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बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी के पूर्व प्रमुख को 1971 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जंग के दौरान युद्ध अपराधों के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई है.

71 साल के मोतिउर रहमान निज़ामी पर नरसंहार, हत्या, बलात्कार और उत्पीड़न के 16 आरोप थे.

सरकारी वकील ने कहा कि सज़ा के एलान से ‘अपराध की गंभीरता’ का पता चलता है. ढाका में तीन जजों के युद्ध अपराध ट्रिब्यूनल ने यह फ़ैसला सुनाया.

हालांकि बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा है कि वो फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

निज़ामी जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख थे. उन पर आरोप था कि वह अल-बद्र नामक संगठन के सुप्रीम कमांडर थे, जिसने बांग्लादेश की आज़ादी के समर्थकों की हत्या में पाकिस्तानी सेना की मदद की थी.

हड़ताल

निज़ामी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार में 2001 से 2006 तक मंत्री रहे थे.

जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने फ़ैसले के ख़िलाफ़ तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है.

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नौ महीने चले युद्ध के दौरान मारे गए लोगों की तादाद को लेकर अलग-अलग आंकड़े पेश किए जाते हैं.

सरकारी आंकड़े के मुताबिक़ क़रीब 30 लाख लोगों की मौत हुई थी जबकि कुछ लोग कहते हैं कि यह आंकड़ा काफ़ी बड़ा है और इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2010 में युद्ध अपराध ट्रिब्यूनल की स्थापना की थी ताकि मुक्ति युद्ध के दौरान हुए अपराधों की समीक्षा की जा सके.

आलोचकों का कहना है कि सरकार ट्रिब्यूनल के बहाने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही है.

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