ऑस्ट्रेलिया में 'मोदी एक्सप्रेस'

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ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर पिछले कुछ समय से उत्साह देखा जा रहा था.

यहां तक कि जब से नरेंद्र मोदी को चुनावी जीत मिली थी तभी से ऑस्ट्रेलिया का भारतीय समुदाय उनके आने की उम्मीद कर रहा था.

17 नवंबर को इंडिया ऑस्ट्रेलिया कम्युनिटी फ़ाउंडेशन (आईएसीएफ़) के बैनर तले भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग के सहयोग से एक समारोह आयोजित किया जाएगा.

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर पर मोदी के लिए ऐसा ही एक कार्यक्रम उनके अमरीका दौरे के दौरान आयोजित किया गया था.

सिडनी दौरे

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टॉनी एबॉट के साथ.

प्रधानमंत्री मोदी सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे और वहां कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं.

मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का प्रमुख कारण जी-20 है.

सिडनी जैसे कार्यक्रम पर्थ और मेलबॉर्न में भी होने हैं.

इस इवेंट के लिए एक ट्रेन भी चलाई जा रही है जो पूरी तरह से बुक हो चुकी है.

'मोदी स्थापना'

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कार्यक्रम के आयोजक और इस ट्रेन के मुसाफ़िर इसे 'द मोदी एक्सप्रेस' के नाम से बुला रहे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि कोई 250 लोग इस ट्रेन से मोदी को सुनने आएंगे.

भाजपा और नरेंद्र मोदी के एक और क़रीबी समर्थक कारोबारी संजय पटेल ने एक कामयाब इवेंट के लिए 'मोदी स्थापना' का आयोजन किया.

उनके कार्यक्रम में स्थानीय सांसद डॉक्टर जियोफ़ ली और गुजरात के मंत्री आनंद भाई पटेल ने हिस्सा लिया.

कला और संस्कृति

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एआईबीसी के सदस्य पॉल मैकेंज़ी कहते हैं, "भारत ऑस्ट्रेलिया के संबंधों का सुनहरा समय आने वाला है."

व्यापारिक मुद्दों के अलावा कुछ ऐसे लोग भी थे जिनकी निगाह इस संबंध के सामाजिक पहलुओं पर अधिक थी.

दूसरी तरफ आईएसीएफ़ के आयोजन में निमंत्रितों की सूची, टिकट और समारोह के स्वरूप से जुड़े सवाल इस इवेंट को उलझाए हुए हैं.

पारदर्शिता की कमी!

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प्रवासी भारतीयों में कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने इवेंट के लिए रजिस्ट्रेशन तो कराया था लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला.

कुछ दूसरे समूहों और संगठनों ने आईएसीएफ़ के कामकाज में पारदर्शिता की कमी की बात भी कही है.

उनका कहना है कि आईएसीएफ़ ने जिस 'सामुदायिक भागीदारी' की बात कही थी उसमें भागीदारी जैसी कोई चीज नहीं है.

टिकटों के मसले पर कई भारतीय संगठनों ने इससे अलग होने का फ़ैसला कर लिया है.

मौजूदगी का एहसास

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कुछ लोग आईएसीएफ़ के इस क़दम को इवेंट की जगह भरे जाने और लोगों के बड़ी तादाद में आने से जोड़कर देखते हैं.

कई संगठनों की ये शिकायत है कि टिकटों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्टॉल्स लगाने जैसे मुद्दों पर उनसे बात नहीं की गई और यहां तक कि आईएसीएफ़ की कमेटी तक भी उनकी पहुँच नहीं थी.

सोमवार को न केवल आईएसीएफ़ के प्रदर्शन बल्कि सिडनी में मौजूद पूरे भारतीय समुदाय की मौजूदगी का एहसास होगा.

और जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'स्टार वार्स' का हवाला दिया था ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समुदाय को उम्मीद है कि ताक़त उनके साथ है.

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