तैरते हुए स्कूल और परवान चढ़ती उम्मीदें

नाव पर तैरते स्कूल इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption दूरदराज में रहने वाले सामाजिक समूहों तक पहुँचने के लिए पानी पर तैरते स्कूलों को एक अच्छा प्रयोग कहा जा सकता है. (फ़ाइल फ़ोटो)

दक्षिणी फिलिपींस में रहने वाली मछुआरा जनजाति के बच्चे इन दिनों पानी पर तैरते स्कूलों में जाते हैं.

फिलिपीन डेली इन्क्वॉयरर की वेबसाइट की खबर के मुताबिक देश के बासिलान, सुलु और तावी-तावी प्रांतों के सुदूर इलाकों में सात गांवों पर एक तैरता हुआ स्कूल खोलने की इजाज़त दी गई है.

वेबसाइट के मुताबिक ये इलाके दूर दराज़ के द्वीपिय क्षेत्र हैं और यहां के बच्चों को पढ़ाई करने में मुश्किल पेश आ रही थी. तैरते हुए स्कूल नावों पर चलाए जाएंगे और इससे तकरीबन 200 बजाउ जनजाति के बच्चों को मदद मिलेगी.

एक अभिभावक ने इस वेबसाइट को बताया कि इससे उनके बच्चों को स्थानीय बाज़ारों अपना सामान बेचते वक्त कोई कम पैसे देकर ठग भी नहीं सकेगा.

एक शिक्षक का कहना था कि कुछ बच्चों को प्रभावशाली जनजातियों के बच्चों ने तंग किया था.

चुनौती बरकरार

इमेज कॉपीरइट AFP

जेन्निलिन जुमदानी फिलिपीन डेली इन्क्वॉयरर से कहती हैं, "यही कारण था कि बजाउ समुदाय के बहुत से बच्चे नियमित स्कूलों में दाखिला लेने से डरते थे."

हालांकि जुमदानी का कहना है कि बोटिंग स्कूलों के सामने अभी भी चुनौती बरक़रार है क्यों कि उनके घर परिवार में मछली पकड़ने के दौरान बच्चों की मदद लेने की जरूरत बनी रहेगी.

तैरते हुए ये स्कूल बांग्लादेश की चैरिटी संस्था 'बीआरएसी' की ओर से चलाए जा रहे हैं. उन्होंने अपनी नावें किनारे पर लगाई हैं, खासकर द्वीपिय क्षेत्रों में क्योंकि यहां रहने वाले लोग स्कूल के स्थायी भवन के लिए ज़मीन देने की स्थिति में नहीं थे.

संस्था की ओर से ऐसी ही परियोजनाएं बांग्लादेश और नाईजीरिया में चलाई जा रही हैं.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार